चिड़िया

'Chidiya', by Amandeep Gujral दूर गगन में उड़ती चिड़िया लौट धरा पर मुझ तक आयी, बोली तू भी पँख लगा ले चल सपनों में गोते खा ले । नभ...

वॉकी-टॉकी दादी-पोती

'Walky Talky Dadi Poti', by Bilqis Zafirul Hasan पार्क की पहली धूप से मिलने उँगली से उँगली को थामे सब को हेलो-हेलो करती वॉकी-टॉकी दादी-पोती सहज-सहज चलती हैं दादी आगे-पीछे फिरती...

अब यह चिड़िया कहाँ रहेगी

'Ab Yeh Chidiya Kahan Rahegi', Bal Kavita by Mahadevi Verma आँधी आयी ज़ोर-शोर से, डालें टूटी हैं झकोर से। उड़ा घोंसला अण्डे फूटे, किससे दुःख की बात कहेगी! अब यह चिड़िया...

कौआ और कोयल

छत के उपर, काँव-काँव कर कौआ शोर मचाता है ढीठ बना वो बैठा रहता कोयल को बहुत सताता है कोयल बोली- कितनी मीठी मेरी बोली सबका मन हर्षाती है तेरी बोली...

चाँद

तुम नद्दी पर जा कर देखो जब नद्दी में नहाए चाँद कैसी लगाई डुबकी उस ने डर है डूब न जाए चाँद किरनों की इक सीढ़ी ले कर छम-छम...

गुड्डे का जन्मदिन

कहो तो! तुम और मैं कैसे तुम्हारा जन्मदिन मना लें? चलो! चाँद से कुछ गप्पे करें सितारों की महफ़िल सजा लें। बन जाएँ फिर से हम गुड्डा और गुड़िया चलो! लें...

सैर सपाटा

'Sair Sapata', Hindi Poem for Kids by Aarsi Prasad Singh कलकत्ते से दमदम आए बाबू जी के हमदम आए हम वर्षा में झमझम आए बर्फी, पेड़े, चमचम लाए। खाते-पीते...

मामी निशा

चंदा मामा गए कचहरी, घर में रहा न कोई, मामी निशा अकेली घर में कब तक रहती सोई! चली घूमने साथ न लेकर कोई सखी-सहेली, देखी उसने...

दादा का मुँह

दादा का मुँह जब चलता है मुझे हँसी तब आती है, अम्माँ मेरे कान खींचकर मुझको डांट पिलाती है! किंतु हँसी बढ़ती जाती है मेरे वश की बात नहीं, चलते...

गूँज

एक कुएँ के ऊँचे तट पर, गाता था लेटा चरवाहा! उठी तरंग किया मुँह नीचे, बोला हो-हो, हा-हा हा-हा! भरकर यह आवाज़ कुएँ में, लौटी ज्यों ही त्यों ही...

फूल और शूल

एक दिन जो बाग में जाना हुआ, दूर से ही महकती आई हवा! खिल रहे थे फूल रँगा-रंग के केसरी थे और गुलाबी थे कहीं, चंपई की बात...

चतुर चित्रकार

चित्रकार सुनसान जगह में, बना रहा था चित्र, इतने ही में वहाँ आ गया, यम राजा का मित्र। उसे देखकर चित्रकार के तुरत उड़ गए होश, नदी,...

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Faiz Ahmad Faiz

पास रहो

तुम मेरे पास रहो मेरे क़ातिल, मेरे दिलदार, मेरे पास रहो जिस घड़ी रात चले, आसमानों का लहू पी के सियह रात चले मरहम-ए-मुश्क लिए, नश्तर-ए-अल्मास लिए बैन करती हुई, हँसती...
Swayam Prakash

पिताजी का समय

अपने घर में मैं परम स्वतंत्र था। जैसे चाहे रहता, जो चाहे करता। मर्ज़ी आती जहाँ जूते फेंक देता, मन करता जहाँ कपड़े। जगह-जगह...
Neem Tree

तेरे वाला हरा

चकमक, जनवरी 2021 अंक से कविता: सुशील शुक्ल  नीम तेरी डाल अनोखी है लहर-लहर लहराए शोखी है नीम तेरे पत्ते बाँके हैं किसने तराशे किसने टाँके हैं नीम तेरे फूल बहुत झीने भीनी ख़ुशबू शक्ल से पश्मीने नीम...
Saadat Hasan Manto

चोर

मुझे बेशुमार लोगों का क़र्ज़ अदा करना था और ये सब शराबनोशी की बदौलत था। रात को जब मैं सोने के लिए चारपाई पर...
God, Abstract Human

होने की सुगन्ध

यही तो घर नहीं और भी रहता हूँ जहाँ-जहाँ जाता हूँ, रह जाता हूँ जहाँ-जहाँ से आता हूँ, कुछ रहना छोड़ आता हूँ जहाँ सदेह गया नहीं वहाँ...
Kumar Vikal

इश्तहार

इसे पढ़ो इसे पढ़ने में कोई डर या ख़तरा नहीं है यह तो एक सरकारी इश्तहार है और आजकल सरकारी इश्तहार दीवार पर चिपका कोई देवता या अवतार...
Morning, Sky, Birds, Sunrise, Sunset

इति नहीं होती

धीर धरना राग वन से रूठकर जाना नहीं पाँखी। फिर नए अँखुए उगेंगे इन कबन्धों में, यह धुँआ कल बदल सकता है सुगन्धों में, आस करना कुछ कटे सिर देख घबराना...
Kumar Ambuj

एक कम है

अब एक कम है तो एक की आवाज़ कम है एक का अस्तित्व, एक का प्रकाश एक का विरोध एक का उठा हुआ हाथ कम है उसके मौसमों के...
Abstract, Time

कहो तो

कहो तो 'इन्द्रधनुष' ख़ून-पसीने को बिना पोंछे दायीं ओर भूख से मरते लोगों का मटमैले आसमान-सा विराट चेहरा बायीं ओर लड़ाई की ललछौंही लपेट में दमकते दस-बीस साथी उभरकर आएगा ठीक तभी सन्नाटे...
Mitro Marjani - Krishna Sobti

कृष्णा सोबती – ‘मित्रो मरजानी’

कृष्णा सोबती के उपन्यास 'मित्रो मरजानी' से उद्धरण | Quotes from 'Mitro Marjani', a Hindi novel by Krishna Sobti   "इस देह से जितना जस-रस ले...
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