नवम्बर डायरी

सुबह की धूप सेंक रहा हूँ, सोच रहा हूँ काश मन की शिकायतों का बोझ अगर पिघल जाता तो कितना सुंदर होता। एक घेरा...

हम ग़द्दार

अमृता प्रीतम की सम्पादकीय डायरी से मैं नहीं जानती—दुनिया में पहली कौन-सी राजनीतिक पार्टी थी, और समय का क्या दबाव था कि उसे लोगों की...

बे-ख़याल बैठा हूँ

बे-ख़याल बैठा हूँ इस लरज़ती रात में। जैसे अभी-अभी एक तारा टूटकर अकेला हुआ है। आसमान में छमकते हैं बचे हुए लहरदार तारे -...

इंस्टा डायरी: ‘उदास शहर की बातें’

मौसम विज्ञान कहता है शहर में आज धूप होगी। लड़की जानती है आज मन भरा हुआ है, और शहर भीग जाएगा। गूगल मैप बताता...

इंस्टा डायरी (पाँचवीं किश्त)

Insta Diary (Part Five) - Diary in Hindi - Gaurow Gupta अक्सर हम जहाँ होते हैं, वहाँ सचमुच में नहीं होते। और कोई चुपके से...

‘तुम्हारे लिए’ – इंस्टा डायरी (चौथी किश्त)

जब वह कमरे से बाहर निकला तो कई रास्ते उसे दिख रहे थे। उसे नहीं पता, कौन-से रास्ते उसे मंज़िल तक ले जाएँगे। अगर...

सखी मोरे पिया घर ना आये

जेठ की भरी दोपहर सबकी नज़रों से छुपाकर सुखाती हूँ... मन! उल्टा-सीधा, अन्दर-बाहर, ऊपर-नीचे सब तरफ़, रूबिक क्यूब जैसा, हर लेयर पर, हर रंग पर...

प्रेम का धुआँ

आत्मा के भीतर एक जगह थी, जहाँ विद्यमान था प्रेमघृत। समय के आवेग में सम्भलना था सो चाहिए थी आग। ताप कम ना हो...

‘तुम्हारे लिए’ – इंस्टा डायरी (तीसरी किश्त)

खामोशी... गहन खामोशी... दोपहर चूम रही है सूखे गुलाब को.. बालकनी में बैठी लड़की उस सूखे गुलाब को निहार रही है... वो उसमें आत्मा...

इंस्टा डायरी (दूसरी किश्त)

मुझे मेरी परछाई से शिकायत है, वह मेरी ठीक-ठीक आकृति नहीं बनाती। वह कभी मेरे कद से छोटा तो कभी मेरे कद से बड़ा तो कभी-कभी...

अपने सिवा हर एक की हँसी-मुस्कराहट अजीब लगती है

"अपने सिवा हर एक की हँसी-मुस्कराहट अजीब लगती है। अस्वाभाविक। लगता है, मौत के साये में कैसे कोई हँस-मुस्करा सकता है। पर फिर अपने गले से भी कुछ वैसी आवाज़ सुनाई देती है।"

इंस्टा डायरी

"मेरी परछाई मुझसे पीठ टिकाकर घण्टों मेरी चुप्पी सुनती है। उतरती-चढ़ती साँसों को रीढ़ की हड्डियों से महसूस कर पाना आसान नहीं, यह कला प्रेम करने वालोंं के हिस्से ही आती है..."

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तुम्हारी जात-पाँत की क्षय

हमारे देश को जिन बातों पर अभिमान है, उनमें जात-पाँत भी एक है। दूसरे मुल्कों में जात-पाँत का भेद समझा जाता है भाषा के...
Anujeet Iqbal

उसका होना

उसके नाम की प्रतिध्वनि किसी स्पन्दन की तरह मन की घाटी में गहरी छुपी रही और मैं एक दारुण हिज्र जीती रही वेदना, व्याकुलता के मनोवेगों में त्वरित बिजुरी की...
Do Log - Gulzar

गुलज़ार के उपन्यास ‘दो लोग’ से किताब अंश

गुलज़ार का उपन्यास 'दो लोग' विभाजन की त्रासदी के बारे में है—त्रासदी भी ऐसी कि इधर आज़ादी की बेला आने को है, और उधर...
Neelabh

जहाँ मैं साँस ले रहा हूँ अभी

जहाँ मैं साँस ले रहा हूँ अभी वहाँ से बहुत कुछ ओझल है ओझल है हत्यारों की माँद ओझल है संसद के नीचे जमा होते किसानों के ख़ून...
Kaynaat

कायनात की कविताएँ

1 इश्क़, तुम मेरी ज़िन्दगी में आओ तो यूँ आओ कि जैसे किसी पिछड़े हुए गाँव में कोई लड़की घण्टों रसोई में खपने के बाद पसीने से भीगी बाहर...
Uberto Stabile

स्पेनिश कवि उबेरतो स्तबिल की कविताएँ

उबेरतो स्तबिल, स्पेनिश कवि और चर्चित अंतर्राष्ट्रीय स्पेनिश पत्रिका के सम्पादक हैं, उनकी कई किताबें प्रकाशित और अनूदित हो चुकी हैं। अनुवाद: पंखुरी सिन्हा एक पाठक...
Pooja Shah

पूजा शाह की कविताएँ

पाज़ेब पाज़ेब पाँवों में नहीं स्तनों पर पहनने से सार्थक होंगी जब औरतें क़दम रखती हैं पकौड़ियों की थाली लिए आदमियों से भरे कमरे में उनकी गपशप के बीच या जब...
Kailash Gautam

कविता मेरी

आलम्बन, आधार यही है, यही सहारा है कविता मेरी जीवन शैली, जीवन धारा है। यही ओढ़ता, यही बिछाता यही पहनता हूँ सबका है वह दर्द जिसे मैं अपना कहता...
Vijay Sharma

क़ब्ल-अज़-तारीख़

सुबह से माँ के घुटनों का दर्द तेज़ था। पिछली रात देसी बाम, गरम पानी और तेल का कोई ख़ास असर नहीं हुआ। इधर...
Lucilla Trappazzo

लुचिल्ला त्रपैज़ो की कविताएँ

लुचिल्ला त्रपैज़ो स्विस इतालवी कवयित्री हैं। उनके चार कविता संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं और उनकी रचनाएँ कई भाषाओं में अनूदित भी हो चुकी...
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