नदी के किनारे की खड़ी चट्टान पर
बैठी हैं दो लड़कियाँ।
हाथ में हाथ पकड़कर
पानी में पत्थर फेंकती हैं।
वही दो लड़कियाँ
जो सालों से शाम को बैठी दिखती थी यहाँ साथ में,
वो लड़कियाँ जिन्होंने एक दूसरे को ना छोड़ने की कसमें बचपन में खेल-खेल में खाई थी।

साल बीते, मौसम बदले।
उनमें से बड़ी लड़की के घर आया है शादी का प्रस्ताव।
उसके बाद जाल में फंसी मछली-सी छटपटाती वो लड़की,
आयी थी उस दिन नदी की उस चट्टान पर
मिलने अपनी प्रेमिका से।

नदी के किनारे खड़ी चट्टान के नीचे मिली हैं दो लड़कियाँ।
हाथ में हाथ पकड़कर पानी में पड़ी हैं अचेत, मरी हुई मछलियों की तरह।
समाज रूपी नदी के बाजू खड़ी चट्टान से कूदकर,
पानी में पत्थर-सी गिरी थी लड़कियाँ।
मैं समाज में रहने वाला एक मछुआरा,
अपने जाल से निकाल फेंक दूँगा उन्हें पानी से बाहर।
मरी हुई मछलियाँ पानी को खराब करती हैं।

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