‘Ek Aur Buddh’, Hindi Kavita by Nidhi Agarwal

वह महल में नहीं
जन्मा था,
न की गई थी उसके जन्म पर
कोई भविष्यवाणी।
कोढ़ी, वृद्ध और मृतक…
गाय, गौरैया और गाँव जैसे ही
सहज थे उसके लिए।
जग के दुःख उसे कभी
विचलित नहीं कर पाए।
कमाने के लिए
यशोधरा की एक हँसी
और पुत्र राहुल की
दो किताबें,
वह प्रतिदिन
उन्हें सोता छोड़
कारख़ाने जाता है।
साँझ ढले
साइकिल के हैंडिल पर लटका
कुछ सब्जी-भाजी
और कुछ आस के अर्द्ध कुम्हलाए फूल
एक बुद्ध हर शाम
घर लौट आता है।

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डॉ. निधि अग्रवाल
डॉ. निधि अग्रवाल पेशे से चिकित्सक हैं। लमही, दोआबा,मुक्तांचल, परिकथा,अभिनव इमरोज आदि साहित्यिक पत्रिकाओं व आकाशवाणी छतरपुर के आकाशवाणी केंद्र के कार्यक्रमों में उनकी कहानियां व कविताएँ , विगत दो वर्षों से निरन्तर प्रकाशित व प्रसारित हो रहीं हैं। प्रथम कहानी संग्रह 'फैंटम लिंब' (प्रकाशाधीन) जल्द ही पाठकों की प्रतिक्रिया हेतु उपलब्ध होगा।