हफ़्तों उनसे मिले हो गए,
विरह में पिलपिले हो गए।

सदके जूड़ों की ऊँचाईयाँ,
सर कई मंज़िले हो गए।

डाकिए से ‘लव’ उनका हुआ,
ख़त हमारे ‘डिले’ हो गए।

परसों शादी हुई, कल तलाक़,
क्या अजब सिलसिले हो गए।

उनके वादों के ऊँचे महल,
क्या हवाई क़िले हो गए।

नौकरी रेडियो की मिली,
गीत उनके ‘रिले’ हो गए।

हाशिये पर छपी जब ग़ज़ल,
दूर शिकवे-गिले हो गए।