उन्होंने पकड़ के रखा हुआ है
हमारी गर्दनों को
अपने हाथों से, रक्त से
सने हुए हैं उनके हाथ

हमारे हाथ
उनके मुताबिक़ काम करते हैं
हमारी आँख
उनके इशारे पर देखती है

और हमारा दिमाग़
उनकी सोच से नियंत्रित होता है

वे स्वतन्त्र घूमते हत्यारे हैं

क्योंकि कानून की पुस्तक में
लिखा नहीं गया प्रावधान
दण्ड का, किसी आत्मा की हत्या का

और हम हत्यारों के द्वारा
संचालित, चलती फिरती
मौन मृत आत्माएँ हैं

हमारी आवाज़ में ही निहित है
हमारी स्वतन्त्रता, परन्तु दुर्भाग्यपूर्ण
आवाज़ ही हमारी हत्या का
एक अन्य कारण भी साबित होगी

आवाज़ में ही दबे हैं
हत्यारों की मुक्ति और
हमारी आत्माओं की हत्या के
सभी रहस्य…

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