स्त्री लेखन

दलित साहित्य

शम्बूक का कटा सिर

जब भी मैंने किसी घने वृक्ष की छाँव में बैठकर घड़ी भर सुस्‍ता लेना चाहा, मेरे कानों में भयानक चीत्‍कारें गूँजने लगीं जैसे हर एक टहनी पर लटकी हो लाखों...

प्रेम

प्रभात की कविताएँ

प्रस्तुति: विजय राही तुम तुमने कहना नहीं चाहा लेकिन कहा पेड़ से बाँध दो इसे खाल उधेड़ो इसकी इच्छा पूरी करो बस्ती की। बाक़ी मुझे बेच दो या शादी करो रहूँगी तो इसी की कौन...

वो जो कोई थी

वो जो कोई थी किसी ज़माने में मेरी उम्र के सफ़ेद और काले पन्नों के बीच किसी सतरंगी चित्र-सी जिसका तय था सम्बन्ध हमारे मिलने के बहुत पहले से ही, बनना था...

विभाजन

‘कितने पाकिस्तान’ – कमलेश्वर

किताब: 'कितने पाकिस्तान' - कमलेश्वर रिव्यू: पूजा भाटिया कमलेश्वर दारा लिखित, राजपाल प्रकाशन द्वारा प्रकाशित, इतिहास के गर्भ से खंगालकर निकाली गयी तमाम घटनाओं/तथ्यों को समय...
saadat hasan manto

मोज़ील

सआदत हसन मंटो की कहानी 'मोज़ील' | 'Mozeel', a story by Saadat Hasan Manto त्रिलोचन ने पहली बार, चार वर्षों में पहली बार, रात को...
Old Woman

नाम

'Naam', a poem by Vikas Sharma मेरी दादी के हाथ पर एक नाम गुदा था... भोली...। हम बच्चे जब अपने नन्हे हाथों से उस नाम को सहलाते थे, दादी की आँखें चमक उठती थीं जैसे...
Shivani (Gaura Pant)

लाल हवेली

शिवानी की कहानी 'लाल हवेली' | 'Lal Haweli', a story by Shivani ताहिरा ने पास की बर्थ पर सोये अपने पति को देखा और एक...
Mohan Rakesh

मलबे का मालिक

"वली, यह मस्जिद ज्यों की त्यों खड़ी है? इन लोगों ने इसका गुरुद्वारा नहीं बना दिया!" "चुप कर, ख़सम-खाने! रोएगा, तो वह मुसलमान तुझे पकड़कर ले जाएगा! कह रही हूँ, चुप कर!" "आजकल लाहौर का क्या हाल है? अनारकली में अब पहले जितनी रौनक होती है या नहीं? सुना है, शाहालमीगेट का बाज़ार पूरा नया बना है? कृष्णनगर में तो कोई ख़ास तब्दीली नहीं आयी? वहाँ का रिश्वतपुरा क्या वाकई रिश्वत के पैसे से बना है?... कहते हैं, पाकिस्तान में अब बुर्का बिल्कुल उड़ गया है, यह ठीक है?..."

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