Poem: ‘I Can’t Tell’ – Orhan Veli Kanik
Translation from Original (Turkish): Talât Sait Halman

अंग्रेज़ी से अनुवाद: देवेश पथ सारिया

अगर रोता हूँ मैं
क्या तुम कविता में सुन पाओगे
मेरी आवाज़,
क्या तुम अपने हाथ से छुओगे
मेरे आँसू

मैं अनभिज्ञ था गीतों की सुन्दरता
और शब्दों की दुर्बलता से
इस मुसीबत के आने से पहले

मैं जानता हूँ कि एक जगह है
जहाँ कुछ भी कहा जा सकना सम्भव है
मैं क़रीब बहुत हूँ उस जगह के

बस,
मैं समझा नहीं सकता।

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देवेश पथ सारिया
बतौर रचनाकार मैं मुख्य रूप से हिन्दी कवि हूं। अनुवाद कार्य एवं कथेतर-गद्य लेखन में भी कुछ रुचि रखता हूँ। साहित्यिक पत्रिकाओं में प्रकाशन: हंस, वागर्थ, कादंबिनी, कथादेश, कथाक्रम, पाखी, आजकल, परिकथा, समयांतर, अकार, बया, बनास जन, जनपथ, समावर्तन, नया पथ, आधारशिला, प्रगतिशील वसुधा, दोआबा, अक्षर पर्व, परिंदे, मंतव्य, कृति ओर, शुक्रवार साहित्यिक वार्षिकी, ककसाड़, उम्मीद, कला समय, रेतपथ, पुष्पगंधा आदि। समाचार पत्रों में प्रकाशन: राजस्थान पत्रिका, दैनिक भास्कर, दि सन्डे पोस्ट। वेब प्रकाशन: सदानीरा, जानकीपुल, पोषम पा, अनुनाद, बिजूका, समकालीन जनमत, शब्दांकन, कारवां, अथाई। सम्प्रति: ताइवान में खगोल शास्त्र में पोस्ट डाक्टरल शोधार्थी। मूल रूप से राजस्थान के राजगढ़ (अलवर) से सम्बन्ध। ई-मेल: [email protected]