जिस दिन चिता जलेगी मेरी कितनों के दिल जलेगें,
कोई गंगा की धार बहेगा,
कोई शांत मन से बह जाएगा,
जब लोग उठाएंगे अर्थी मन मेरा भी चिल्लाएगा,
रुक जाओ ठहर जाओ थोड़ा,
उन आँखों को देख लेने दो,
जिन आँखों से कभी प्यार किया
उन-उन आँखों मे डूब जाने दो,
लेकिन, ठहरना मुश्किल है
मुझको पुकारे गंगा की कल-कल धार,
जब पहुँचूँगा मणिकर्णिका पर चार लोगों के उन कंधों पर,
जिन कंधों पर कभी हाथ रमाए घूमता था,
वो मंदिर के घण्टियों की कल-कल, वही घाट का तीर होगा,
हम तो होगें लेकिन हमारे होने का एहसास नहीं होगा।

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