जो जीवन की धूल चाटकर बड़ा हुआ है
तूफ़ानों से लड़ा और फिर खड़ा हुआ है
जिसने सोने को खोदा, लोहा मोड़ा है
जो रवि के रथ का घोड़ा है
वह जन मारे नहीं मरेगा,
नहीं मरेगा।

जो जीवन की आग जलाकर आग बना है
फ़ौलादी पंजे फैलाए नाग बना है
जिसने शोषण को तोड़ा, शासन मोड़ा है
जो युग के रथ का घोड़ा है
वह जन मारे नहीं मरेगा,
नहीं मरेगा।

केदारनाथ अग्रवाल की कविता 'मज़दूर का जन्म'

Book by Kedarnath Agarwal:

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केदारनाथ अग्रवाल
केदारनाथ अग्रवाल (जन्म: 1 अप्रैल, 1911; मृत्यु: 22 जून, 2000) प्रगतिशील काव्य-धारा के एक प्रमुख कवि हैं। उनका पहला काव्य-संग्रह 'युग की गंगा' देश की आज़ादी के पहले मार्च, 1947 में प्रकाशित हुआ। हिंदी साहित्य के इतिहास को समझने के लिए यह संग्रह एक बहुमूल्य दस्तावेज़ है।

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