‘ऐसे नहीं होते कवि’ कहा मेरी
बेटी ने, ग्यारह साल की—
देखती हूँ, बहुत दिनों से नहीं
पूछा आपने, पौधों के बारे में।

छत पर नहीं गए
देखने तारे।

बारिश हुई, इतनी हरी घास उगी,
कैसी चमकती है धूप में, वहाँ
देखा नहीं आपको देखते
उस घास को।

‘ऐसे नहीं होते कवि’
—कहा मेरी बेटी ने।

प्रयाग शुक्ल की कविता 'हमें नहीं मालूम था'

Book by Prayag Shukla:

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प्रयाग शुक्ल
प्रयाग शुक्ल (जन्म १९४०) हिन्दी के कवि, कला-समीक्षक, अनुवादक एवं कहानीकार हैं। ये साहित्य अकादेमी का अनुवाद पुरस्कार, शरद जोशी सम्मान एवं द्विजदेव सम्मान से सम्मानित हैं।

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