कुहू-कुहू किलकार सुरीली कोयल कूक मचाती है,
सिर और चोंच झुकाए डाल पर बैठी तान उड़ाती है।

एक डाल पर बैठ एक पल झट हवा से उड़ जाती है,
पेड़ों बीच फड़कती फिरती चंचल निपट सुहाती है।

डाली-डाली पर मतवाली मीठे बोल सुनाती है,
है कुरूप काली पर तो भी जग प्यारी कहलाती है।

इससे हमें सीखना चाहिए सदा बोलना मधुर वचन,
जिससे करै प्यार हमको सब जानें अपना बंधु स्वजन।

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श्रीधर पाठक
श्रीधर पाठक (११ जनवरी १८५८ - १३ सितंबर १९२८) प्राकृतिक सौंदर्य, स्वदेश प्रेम तथा समाजसुधार की भावनाओ के हिन्दी कवि थे। वे प्रकृतिप्रेमी, सरल, उदार, नम्र, सहृदय, स्वच्छंद तथा विनोदी थे। वे हिंदी साहित्य सम्मेलन के पाँचवें अधिवेशन (1915, लखनऊ) के सभापति हुए और 'कविभूषण' की उपाधि से विभूषित भी। हिंदी, संस्कृत और अंग्रेजी पर उनका समान अधिकार था।

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