‘Kya Hoon Main Tumhare Liye’, a poem by Nirmala Putul

क्या हूँ मैं तुम्हारे लिए?
एक तकिया
कि कहीं से थका-मांदा आया और सिर टिका दिया

कोई खूँटी
कि ऊब, उदासी, थकान से भरी कमीज़ उतारकर टाँग दी

या आँगन में तनी अरगनी
कि कपड़े लाद दिए,
घर
कि सुबह निकला और शाम लौट आया,
कोई डायरी
कि जब चाहा कुछ न कुछ लिख दिया

या ख़ामोशी-भरी दीवार
कि जब चाहा वहाँ कील ठोक दी,
कोई गेंद
कि जब तब जैसे चाहा उछाल दी,
या कोई चादर
कि जब जहाँ जैसे तैसे ओढ़-बिछा ली

क्यूँ? कहो, क्या हूँ मैं तुम्हारे लिए?

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Book by Nirmala Putul:

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निर्मला पुतुल
निर्मला पुतुल (जन्मः 6 मार्च 1972) बहुचर्चित संताली लेखिका, कवयित्री और सोशल एक्टिविस्स्ट हैं। दुमका, संताल परगना (झारखंड) के दुधानी कुरुवा गांव में जन्मी निर्मला पुतुल हिंदी कविता में एक परिचित आदिवासी नाम है। निर्मला ने राजनीतिशास्त्र में ऑनर्स और नर्सिंग में डिप्लोमा किया है।