संसार की सारी
मछलियाँ,
तितलियाँ,
लड़कियाँ थी पिछले
जन्मों में
जो प्रेममय होने
की आखरी सीढ़ी
के पायदान
से गिर गयीं।

बेलिबास विचरण करती
उनकी आत्मा की
प्रेम से प्रेमत्व तक
पहुँचने की यात्रा
अधूरी रह गयी।

मैंने कल देखी थी
एक परछाई…
सज-सँवर कर जाती
रात के आख़िरी पहर
और सुनी थी
‘पायल’ की आवाज़
शायद वो भी मछली
बनने जा रही थी?

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