लड़कियाँ

‘Ladkiyan’, Hindi Kavita by Pratibha Gupta

चार लोगों के मुँह से
सुनी बातों को
चार फाँकी में काटकर
कूचने वाली लड़कियाँ
खेलती है लंगड़ी और कंचे
और दौड़ती हैं नींदों में
और माँओं से सुनती हैं
दुनिया की सबसे विचित्र लोरियाँ
जब उनकी माँएँ चिल्लाती हैं
कितना लात मारती है सोते समय
ऐसी लड़कियाँ डाँट खाते समय
भुला देती हैं स्वर-व्यञ्जन का ज्ञान
तब उन्हें कही गई गालियाँ
महज़ एक शोर होती हैं
मार खाते समय भी
ये भुला देती हैं
कि न्यूटन ने भी
दिया था कोई नियम
ऐसी लड़कियाँ स्वप्न में पकाती हैं
अपनी ख़्वाहिशें तेज आँच पर
तुम उनकी नींदों का पृष्ठ मत पलटना
तुम्हारी उंगलियाँ कट सकती हैं…

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