चार लोगों के मुँह से
सुनी बातों को
चार फाँकी में काटकर
कूचने वाली लड़कियाँ
खेलती है लंगड़ी और कंचे
और दौड़ती हैं नींदों में
और माँओं से सुनती हैं
दुनिया की सबसे विचित्र लोरियाँ
जब उनकी माँएँ चिल्लाती हैं
कितना लात मारती है सोते समय
ऐसी लड़कियाँ डाँट खाते समय
भुला देती हैं स्वर-व्यञ्जन का ज्ञान
तब उन्हें कही गई गालियाँ
महज़ एक शोर होती हैं
मार खाते समय भी
ये भुला देती हैं
कि न्यूटन ने भी
दिया था कोई नियम
ऐसी लड़कियाँ स्वप्न में पकाती हैं
अपनी ख़्वाहिशें तेज आँच पर
तुम उनकी नींदों का पृष्ठ मत पलटना
तुम्हारी उंगलियाँ कट सकती हैं…

प्रतिभा गुप्ता की कविता 'पृथ्वी की नाक और चिट्ठी'

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प्रतिभा गुप्ता
प्रतिभा गुप्ता अवध के शहर गोण्डा से हैं। ये गणित विषय में परास्नातक की छात्रा हैं तथा दो साल अध्यापन कार्य से भी जुड़ी रहीं हैं। कवितायें लिखने तथा पढ़ने के अलावा संगीत में भी इनकी विशेष रुचि है।

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