लाओ अपना हाथ मेरे हाथ में दो
नये क्षितिजों तक चलेंगे

हाथ में हाथ डालकर
सूरज से मिलेंगे।

इसके पहले भी
चला हूँ लेकर हाथ में हाथ
मगर वे हाथ
किरनों के थे, फूलों के थे
सावन के
सरितामय कूलों के थे

तुम्हारे हाथ
उनसे नये हैं, अलग हैं
एक अलग तरह से ज़्यादा सजग हैं
वे उन सबसे नये हैं
सख़्त हैं, तकलीफ़देह हैं
जवान हैं

मैं तुम्हारे हाथ
अपने हाथों में लेना चाहता हूँ
नये क्षितिज
तुम्हें देना चाहता हूँ
ख़ुद पाना चाहता हूँ

तुम्हारा हाथ अपने हाथ में लेकर
मैं सब जगह जाना चाहता हूँ

दो अपना हाथ मेरे हाथ में
नए क्षितिजों तक चलेंगे
साथ-साथ सूरज से मिलेंगे।

भवानी प्रसाद मिश्र की कविता 'सतपुड़ा के जंगल'

Book by Bhawani Prasad Mishra:

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भवानी प्रसाद मिश्र
भवानी प्रसाद मिश्र (जन्म: २९ मार्च १९१४ - मृत्यु: २० फ़रवरी १९८५) हिन्दी के प्रसिद्ध कवि तथा गांधीवादी विचारक थे। वे दूसरे तार-सप्तक के एक प्रमुख कवि हैं। गाँधीवाद की स्वच्छता, पावनता और नैतिकता का प्रभाव तथा उसकी झलक उनकी कविताओं में साफ़ देखी जा सकती है।

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