लोग जहर उगलते हैं, रोज चेहरे बदलते हैं,
सच के बने सभी किरदार हैं जो,
झूठ और फरेब पे सवार होकर चलते हैं।

बवन्डर नफरतों का जेहन में बरकरार हैं जिनके
बातें वो सारी प्यार-मोहब्बत की करते हैं,
किसी की कामयाबी की खुशी में, शरीक होने वाले लोग,
उसकी कामयाबी के चर्चों से भी जलते हैं।

दुआ करते हैं कि सदा सलामत रहे तू
जिनके दिलों में हमारे लिये नफरतों के बीज पलते हैं,
हर कदम पे साथ निभाने का वादा करते थे कभी जो,
वक्त आने पर वो न घर से बाहर निकलते हैं।

बहुत विश्वास था जिनपे कभी भी न छलेगें ये,
वही विश्वास तोड़ के हमें हर बार छलते हैं,
अब न भरोसे का कोई इन्सान है साहब,
भरोसा तोड़ यहाँ इंसा को इंसा ठगते हैं।

साँपों का जहर शामिल है यहाँ लोगों में
हर बार विष भरकर यहाँ इन्सान डसते हैं,
बहुत चालाकियां सीख ली हमने भी यहाँ लोगों से
जहर में डूबे किरदारों के जाल में अब हम न फँसते हैं॥

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शिवांकित तिवारी 'शिवा'
Young Poet, Writer and Motivational Speaker! Medical Student By Profession!

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