अब सारा धुँआ
वाष्प बनकर
मन के किसी कोने में
दुबक्कर सिमट जाता है
कभी थक्के दिखने लगते हैं
यहाँ – वहाँ
कहीं थोड़ी गर्द
जमने लगती है
नवीकरण की चाहत मे
रक्तस्त्राव
का खतरा बना रहता है
लेकिन अब सारी
लिप्साओं
को मुखाग्नि समर्पित कर दी है
अग्रसर हूँ
स्वयं की खोज में
एक नई कोशिश
एक नई राह…

सारिका पारीक ‘जुवि’
मुंबई

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सारिका पारीक
सारिका पारीक 'जूवि' मुम्बई से हैं और इनकी कविताएँ दैनिक अखबार 'युगपक्ष', युग प्रवर्तक, कई ऑनलाइन पोर्टल पत्रिकाएं, प्रतिष्ठित पत्रिका पाखी, सरस्वती सुमन, अंतरराष्ट्रीय पत्रिका सेतु, हॉलैंड की अमस्टेल गंगा में प्रकाशित हो चुकी हैं।

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