मगर मैं ख़ुदा से कहूँगा

ख़ुदा-वंद! मेरी सज़ा तू किसी और को दे
कि मैंने यहाँ
इस ज़मीं पर
सज़ाएँ क़ुबूलीं हैं उनकी
कि जिनसे मुझे सिर्फ़ इतना तअल्लुक़ रहा है
कि मैं और वो
दोनों तुझको ख़ुदा मानते थे!

ये सच है
तिरा अक्स देखा था हमने अलग आईनों में
मगर मैं ख़ुदा से कहूँगा
ख़ुदा-वंद! ये दिन क़यामत का दिन है
ये वो दिन है
जब तूने हम सब पे अपने को ज़ाहिर किया है
तो इस वक़्त मेरे गुनाहों से पर्दा उठाकर
ख़ुदावंद! तू अपनी नूरानियों
अपनी ताबानियों को मुलव्विस न कर
मुझे मुआफ़ कर दे
उसे मुआफ़ कर दे
कि मैं और वो दोनों तुझको ख़ुदा मानते थे

ये सच है
तिरा अक्स देखा था हमने अलग आईनों में
हमें मुआफ़ कर दे
कि हमने सज़ाएँ क़ुबूल की हैं इक-दूसरे की!
हमें मुआफ़ कर दे
कि सारे गुनाह सारी तक़्सीरें
सच-सच बताऊँ
इसी दिन की ख़ातिर हुई थीं…

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