एक औरत मुजफ़्फ़रपुर जंक्शन के प्लेटफ़ार्म पर
मरी लेटी है
उसका बच्चा उसके पास खेल रहा है
बच्चे की उम्र महज़ एक साल है

एक औरत की गोद में बच्चा है
वह अपने मरे पति की तस्वीर दिखा रही है
किसी अख़बार वाले को दिल्ली में
उस औरत की उम्र महज़ पन्द्रह साल है

एक मज़दूर लड़की अपने घर से कुछ दूर
साँस उखड़ने से मर गई महाराष्ट्र में
कुछ बारह-तेरह साल की थी वह

एक रबड़ कारख़ाने में काम करने वाला मज़दूर
बिहार आते समय ट्रक दुर्घटना में मर गया
एक युवा पीढ़ी का कामगार ही तो था वह

मैं उन में से किसी की भी जगह मर गया होता
और
उनमें से कोई एक भी जीवित होता
मेरे मरने का सौन्दर्य देखने लायक़ होता!

रोहित ठाकुर की कविता 'भाषा के पहाड़ के उस पार'

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रोहित ठाकुर
जन्म तिथि - 06/12/1978; शैक्षणिक योग्यता - परा-स्नातक राजनीति विज्ञान; निवास: पटना, बिहार | विभिन्न प्रतिष्ठित साहित्यिक पत्र पत्रिकाओं बया, हंस, वागर्थ, पूर्वग्रह ,दोआबा , तद्भव, कथादेश, आजकल, मधुमती आदि में कविताएँ प्रकाशित | विभिन्न प्रतिष्ठित समाचार-पत्रों - हिन्दुस्तान, प्रभात खबर, अमर उजाला आदि में कविताएँ प्रकाशित | 50 से अधिक ब्लॉगों पर कविताएँ प्रकाशित | कविताओं का मराठी और पंजाबी भाषा में अनुवाद प्रकाशित।

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