मैं फिर फिर लौटूँगा

मैं फिर फिर लौटूँगा
मगर तिजोरी जैसे घर
और कोठरी जैसे दफ़्तर को
भूलना चाहूँगा
मैं कहीं और लौटूँगा

मैं उदास बच्चों के लिए खिलौना
नवजातों के लिए खस-खस
रोती हुई लड़की के लिए कंधा
सहमी हुई औरत के लिए ढाढ़स
बनकर लौटूँगा
मैं फिर फिर लौटूँगा।

मैं फिर फिर लौटूँगा
मगर आदम की इस जात में
और चमड़े के इस गात में
प्रविष्टि न चाहूँगा
मैं कहीं और लौटूँगा

यहाँ के दु:खों से अलगाव कर
मृत्यु से थोड़ा मोल-भाव कर
समय के उस पार
हर दम जीने को तैयार
गुनगुनाता जाऊँगा
मैं फिर फिर लौटूँगा।

मैं फिर फिर लौटूँगा
ऋतुएँ मुझे बसन्तराज पुकारेंगी
मौसम सब सुहाना कहके बुलायेंगे
मैं बादलों के जिस्म सा फ़ानी बन
इस धरती की ज़िन्दगानी बन
भीगोता चलूँगा
मैं गिर गिर उठूँगा

इस बार नाराज़ हैं बहुत साथी
कि मेरे चेहरे पर मुस्कान नहीं आती
अबके जब लौटूँगा
मुस्कुराता मिलूँगा
मैं फिर फिर लौटूँगा।

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