‘Main Phir Phir Lautoonga’, a poem by Rahul Boyal

मैं फिर फिर लौटूँगा
मगर तिजोरी जैसे घर
और कोठरी जैसे दफ़्तर को
भूलना चाहूँगा
मैं कहीं और लौटूँगा

मैं उदास बच्चों के लिए खिलौना
नवजातों के लिए खस-खस
रोती हुई लड़की के लिए कंधा
सहमी हुई औरत के लिए ढाढ़स
बनकर लौटूँगा
मैं फिर फिर लौटूँगा।

मैं फिर फिर लौटूँगा
मगर आदम की इस जात में
और चमड़े के इस गात में
प्रविष्टि न चाहूँगा
मैं कहीं और लौटूँगा

यहाँ के दु:खों से अलगाव कर
मृत्यु से थोड़ा मोल-भाव कर
समय के उस पार
हर दम जीने को तैयार
गुनगुनाता जाऊँगा
मैं फिर फिर लौटूँगा।

मैं फिर फिर लौटूँगा
ऋतुएँ मुझे बसन्तराज पुकारेंगी
मौसम सब सुहाना कहके बुलायेंगे
मैं बादलों के जिस्म सा फ़ानी बन
इस धरती की ज़िन्दगानी बन
भीगोता चलूँगा
मैं गिर गिर उठूँगा

इस बार नाराज़ हैं बहुत साथी
कि मेरे चेहरे पर मुस्कान नहीं आती
अबके जब लौटूँगा
मुस्कुराता मिलूँगा
मैं फिर फिर लौटूँगा।

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राहुल बोयल
जन्म दिनांक- 23.06.1985; जन्म स्थान- जयपहाड़ी, जिला-झुन्झुनूं( राजस्थान) सम्प्रति- राजस्व विभाग में कार्यरत पुस्तक- समय की नदी पर पुल नहीं होता (कविता - संग्रह) नष्ट नहीं होगा प्रेम ( कविता - संग्रह) मैं चाबियों से नहीं खुलता (काव्य संग्रह) ज़र्रे-ज़र्रे की ख़्वाहिश (ग़ज़ल संग्रह) मोबाइल नम्बर- 7726060287, 7062601038 ई मेल पता- [email protected]

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