दूसरे-दूसरे कारणों से मारा जाऊँगा

बहुत अधिक सुख से
अकठिन सहज यात्राविराम से
या फिर भीतर तक बैठी
जड़ शान्ति से

लेकिन नहीं मरूँगा
कुशासन की कमीनी चालों से
आए दिन के मिथ्या स्पष्टीकरणों से
रेल आरक्षण की अनुपलब्धता से
पत्नी, बच्चों की लौट आने की
गुहार से तो क़तई नहीं
अनमिले मित्रों के भटकाव भरे
रास्तों पर चलने से बिल्कुल नहीं

इस सूखी धरती के
आक-धतूरे की प्यास देखकर
शायद और भी अधिक
जीवित हो रहूँगा।

ऋतुराज की कविता 'अँधेरे में प्रार्थना'

Book by Rituraj:

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ऋतुराज
कवि ऋतुराज का जन्म राजस्थान में भरतपुर जनपद में सन 1940 में हुआ। उन्होंने राजस्थान विश्वविद्यालय जयपुर से अंग्रेजी में एम. ए. की उपाधि ग्रहण की। उन्होंने लगभग चालीस वर्षों तक अंग्रेजी-अध्ययन किया। ऋतुराज के अब तक के प्रकाशित काव्य संग्रहों में 'पुल पानी मे', 'एक मरणधर्मा और अन्य', 'सूरत निरत' तथा 'लीला अरविंद' प्रमुख है।

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