बाप की उँगली थामे
इक नन्हा-सा बच्चा
पहले-पहल मेले में गया तो
अपनी भोली-भाली
कंचों जैसी आँखों से
इक दुनिया देखी
ये क्या है और वो क्या है
सब उसने पूछा
बाप ने झुककर
कितनी सारी चीज़ों और खेलों का
उसको नाम बताया
नट का
बाज़ीगर का
जादूगर का
उसको काम बताया
फिर वो घर की जानिब लौटे
गोद के झूले में
बच्चे ने बाप के कंधे पर सर रक्खा
बाप ने पूछा—
नींद आती है?

वक़्त भी एक परिंदा है
उड़ता रहता है

गाँव में फिर इक मेला आया
बूढ़े बाप ने काँपते हाथों से
बेटे की बाँह को थामा
और बेटे ने
ये क्या है और वो क्या है
जितना भी बन पाया
समझाया
बाप ने बेटे के कंधे पर सर रक्खा
बेटे ने पूछा—
नींद आती है?

बाप ने मुड़ के
याद की पगडंडी पर चलते
बीते हुए
सब अच्छे-बुरे
और कड़वे-मीठे
लम्हों के पैरों से उड़ती
धूल को देखा
फिर
अपने बेटे को देखा
होंठों पर
इक हल्की-सी मुस्कान आयी,
हौले से बोला—
हाँ!
मुझको अब नींद आती है!

Book by Javed Akhtar:

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जावेद अख़्तर
जावेद अख़्तर कवि और हिन्दी फिल्मों के गीतकार और पटकथा लेखक हैं। वह सीता और गीता, ज़ंजीर, दीवार और शोले की कहानी, पटकथा और संवाद लिखने के लिये प्रसिद्ध है। ऐसा वो सलीम खान के साथ सलीम-जावेद की जोड़ी के रूप में करते थे। इसके बाद उन्होंने गीत लिखना जारी किया जिसमें तेज़ाब, 1942: अ लव स्टोरी, बॉर्डर और लगान शामिल हैं। उन्हें कई फ़िल्मफ़ेयर पुरस्कार, राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कार और पद्म भूषण प्राप्त हैं।