बुख़ारी साहब

'Bukhari Sahab', a Memoir (Sansmaran) by Faiz Ahmad Faiz ..."दोस्ती तनदिही और मुस्तैदी का नाम है यारो, मुहब्बत तो योंही कहने की बात है। देखो...

डॉक्टर ने समुचित इलाज से मना किया जिससे युवा स्त्री की...

यह घटना भी आँखें खोलने वाली है। यह घटना काठियावाड़ में एक गाँव की अछूत स्कूल में पढ़ाने वाली शिक्षिका की है। मिस्टर गांधी...

दौलताबाद के किले में पानी को दूषित करना

"पहले मैंने एक उदाहरण दिया था कि कैसे एक अछूत हिंदू पारसी के लिए भी अछूत होता है। जबकि यह उदाहरण दिखाता है कि कैसे एक अछूत हिंदू मुसलमान के लिए भी अछूत होता है।"

दोज़ख़ी

उर्दू के बेहतरीन संस्मरणों में से एक, इस्मत चुग़ताई अपने भाई और उर्दू लेखक अज़ीमबेग चुग़ताई को याद करते हुए! "बीवी शौहर न समझती, बच्चे बाप न समझते, बहन ने कह दिया, तुम मेरे भाई नहीं और भाई आवाज़ सुनकर नफ़रत से मुँह मोड़ लेते। माँ कहती- साँप जना था मैंने!" "विश्वास नहीं होता कि इस क़दर सूखा-मारा इन्सान, जिसने अपनी बीवी के अलावा किसी तरफ़ आँख उठाकर न देखा, कल्पना में कितना ऐयाश बन जाता है। ओफ़्फ़ोह!" "वो कहीं पर भी जायें, मैं देखना चाहती हूँ, क्या वहाँ भी उनकी वही कैंची-जैसी ज़बान चल रही है? क्या वहाँ भी वो हूरों से इश्क़ लड़ा रहे हैं या दोज़ख़ के फ़रिश्तों को जलाकर मुस्करा रहे हैं?"

चालिसगाँव में आत्मसम्मान, गँवारपन और गंभीर दुर्घटना

"मेरी शान के लिए चालिसगाँव के महार लोगों ने मेरी ज़िन्दगी दाँव पर लगा दी।"

मेरी पहली कविता

"मेरे फुफेरे भाई हुक्का पिया करते थे। सुबह-शाम जब भी मैं उनके पास जाता उन्हें हुक्का पीते पाता था। उनका कमरा तम्बाकू के धुएँ की नशीली गंध से भरा रहता था। उन्हें धुआँ उड़ाते देखकर तम्बाकू के धुएँ पर मैंने अनेक छन्द लिखे हैं।"

पश्चिम से लौटकर आने के बाद बड़ौदा में रहने की जगह...

"मेरी हालत इस कदर खराब थी कि जब मेरी बहन का बेटा बंबई से मेरा बचा हुआ सामान लेकर आया और उसने मेरी हालत देखी तो वह इतनी जोर-जोर से रोने लगा कि मुझे तुरंत उसे वापस भेजना पड़ा। इस हालत में मैं पारसी सराय में एक पारसी बन कर रहा।"

बचपन में दुस्वप्न बनी कोरेगाँव की यात्रा

हमारा परिवार मूल रूप से बांबे प्रसिडेंसी के रत्नागिरी जिले में स्थित डापोली तालुके का निवासी है। ईस्ट इंडिया कंपनी का राज शुरू होने...

द्वारा 56 एपीओ

(सेना की ट्रेनिंग में माँ की लिखी चिट्ठियों से कुछ अंश) आरम्भ मैं कुशल से हूँ तुम्हारा कुशल क़ायम हेतु सदा ईश्वर से मनाया करती हूँ...

निर्जला

"मेरा व्यथित मन चीखना चाहता है और पूछना चाहता है कि निर्जला के माँस के गुलाबी रेशे किसके दाँतों में फँसे हैं?"

स्नेह भरी उँगली

"यहीं नौवीं में हिन्दी पढ़ाते समय जब किसी एक सहपाठी ने हमारे हिन्दी के शिक्षक को बताया कि मैं भवानी प्रसाद मिश्र का बेटा हूँ तो उन्होंने उसे 'झूठ बोलते हो' कह दिया था। बाद में उनने मुझसे भी लगभग उसी तेज आवाज में पिता का नाम पूछा था। घर का पता पूछा था, फिर किसी शाम वे घर भी आए। अपनी कविताएँ भी मन्ना को सुनाईं। मन्ना ने भी कुछ सुनाया था। उस टेंटवाले स्कूल में ऐसे कवि का बेटा? मन्ना की प्रसिद्धि हमें इन्हीं मापदण्डों, प्रसंगों से जानने मिली थीं।"

ऐसा देश है मेरा

“मुसलमानों, भारत छोड़ो!” “बाबर की औलादों, भारत छोड़ो!” “गर भारत में रहना है, तो वन्दे मातरम् कहना है!” “देश के गद्दारों को, गोली मारो सालों को!” यही नारे...

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