कहते हैं बेटियाँ पिता को ज़्यादा प्यारी होती हैं…

बचपन से ही देखती आ रही हूँ
और आज भी
जब अपनी नन्हीं बिटिया को
उसके पिता के कंधो पर सवार
खिलखिलाते हुए देखती हूँ
मुझे आप ही याद आते हो पापा…

हमने एक लड़ाई साथ-साथ लड़ी है..

एक बेहतर ज़िंदगी की तलाश में
आपने कभी भी आड़े नहीं आने दिया
मेरा लड़की होना..

बल्कि मुझे प्रतिष्ठित किया
घर के सबसे बड़े बेटे के रूप में..

हमनें साथ-साथ किया है..
एक मकान से घर का निर्माण..
काॅलेज की फीस का इंतिज़ाम..
छुटकी की ख़ामोशी को समझना
छुटके की शरारतों को संभालना
वही छुटका
जो ग्यारह साल छोटा होकर भी
आज मुझे बिल्कुल वैसे ही संभालता है
जैसे आप संभालते आए हो…

कभी-कभी सोचती हूँ
मैं वह कभी नहीं होती जो आज हूँ..
अगर आप मेरे पिता नहीं होते..
और शायद सबसे क़रीबी रिश्तेदार
मेरे पिता होते…

आपने मुझे
मुझसे मिलवाया…
मेरे हर गुण-दोष से मिलवाया..
मैं उन नितांत निजी बातों को
माँ के रहते हुए भी
केवल आपसे कह सकी
जो केवल माँ-बेटी के बीच का संवाद होते हैं..

मैं जब-जब संसार के चक्रव्यूह में फंसी
अगर बाहर निकल सकी
तो केवल इसलिए
कि मेरे अर्जुन मेरे साथ थे
हमेशा, ठीक मेरे पीछे खड़े हुए…

कितने रूपक।.. कितने उपमान
इस दुनिया में गढ़े गये हैं..
लेकिन मैं आपको सिर्फ़ पिता कहकर पुकार रही हूँ
मेरा संपूर्ण रूप से
पालन और पोषण करने वाले
मेरे पिता….

-पूनम सोनछात्रा

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