रास्ते और मेरा सफर

मैं खुद को ही मंजिल मानकर चलता रहा अनजानी राहों पर, कुछ देर चलने के बाद मैं पीछे मुड़कर देखता हूँ तो गहरा शून्य...

घर में घर का निशाँ ढूँढता हूँ।

छत तो है बस मकाँ ढूँढता हूँ घर में घर का निशाँ ढूँढता हूँ। जमीं पे सबका हक़ है अपना अपना अब तो रहने को आसमाँ ढूँढता...

कैसे करूँ

हर मौसम तेरी यादों का मौसम लगता है मैं तुझसे बचना चाहूँ भी तो कैसे तन्हाइयों में भी हरदम हमराह तू ही होता है तेरे साये से...

मोहब्बत देखूं

तेरी याद में मैं खुद को बिखरा इस तरह देखूँ पतझड़ में पेड़ की पत्ती का पेड़ से विरह देखूं ।। आ दौड़ के और भर...

ज़ीस्त ये कैसी जंजाल में है

ज़ीस्त ये कैसी जंजाल में है चलना इसे हर हाल में है माज़ी के पीछे चलने वाले हाल तेरा किस हाल में है जवाब छोड़ तो आये हो...

अँधेरा

आदत हो गयी है मुझको, अब तो अंधरे में रहने की बुझा देता हूँ चराग, डर लगने लगा अब तो उजाले से निकल आता है खुर्शीद...

आगोश

ज़र प्रेम के बाद तुम्हारे आगोश में सिमटकर मासूमियत से सो जाना , जैसे किसी प्रेम पगी कविता की असाधारण अन्तिम पँक्ति लिखना। - निधि...

दो दुनिया का फासला

"सुबह के पौने ग्यारह बजे रोड-रैश खेलते हुए आता विक्रम ऑटो पकड़ती हूँ और ड्राइवर सीट के पिछले हिस्से से सटी सीट पर टिक जाती हूँ।  टिकना यहाँ उपयुक्त शब्द है क्योंकि ग़ाज़ियाबाद के ऑटो में 'बैठने' की लक्ज़री तो किस्मत वालों को मिलती है। बहरहाल, आधा ध्यान घड़ी की सुई पर है और आधा सामने लगे लाल-हरी चोली का एक सिरा मुँह में दबाये लड़की के चित्र पर। नीचे लिखा है - 'सिर्फ तुम'।"

मदहोशी

चलते चलते मुझे लगा कि मैं गलत आ गया हूँ एक व्यक्ति से रास्ता पूछा उसने कोई तवज्जो नहीं दी पास में ही शराब की दुकान थी एक सज्जन...

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विदा

'अभी जिया नहीं' से विदा का शब्दों से निकलकर जब स्मृतियों में अस्तित्व हो जाता है दूर होना किसी किताब का बेमानी शब्द-सा रह जाता है किसी का...
Malala Yousafzai

संयुक्त राष्ट्र में दिया मलाला का भाषण

'मलाला हूँ मैं' से संयुक्त राष्ट्र ने जुलाई 12 का दिन ‘मलाला दिवस’ घोषित किया है। 12 जुलाई, 2013 को अपने 16वें जन्मदिवस पर मलाला...
Viren Dangwal

इतने भले नहीं बन जाना

इतने भले नहीं बन जाना साथी जितने भले हुआ करते हैं सरकस के हाथी गदहा बनने में लगा दी अपनी सारी क़ुव्वत, सारी प्रतिभा किसी से कुछ लिया...
Dharmasthal - Priyamvad

प्रियम्वद – ‘धर्मस्थल’

प्रियम्वद की किताब 'धर्मस्थल' से उद्धरण | Hindi Quotes by 'Dharmasthal', a book by Priyamvad संकलन: विजय शर्मा   "रचना के संसार में जब तुम कुछ नया...
Bhagat Singh

युवक!

आचार्य शिवपूजन सहाय की डायरी के अंश, 23 मार्च, पृष्ठ 28 सन्ध्या समय सम्मेलन भवन के रंगमंच पर देशभक्त भगत सिंह की स्मृति में सभा...
Rajni Tilak

मीठी अनुभूतियों को

हमने मधुर स्मृतियों और मीठी अनुभूतियों को इन कठोर हाथों से, तुम्हारे लिए हृदय से खींच बिखेरा है हमारे लहू के एक-एक क़तरे ने तुम्हारे खेत की बंजर भूमि...
Vijay Sharma

घोष बाबू और उनकी माँ

"हम यहाँ से निकलकर कहाँ जाएँगे?" — शिल्पा ने अनिमेष के कंधे पर सिर रक्खे कहा। "जहाँ क़िस्मत ले जाए!" — अनिमेष की आवाज़ में...
Ahmad Faraz

ले उड़ा फिर कोई ख़याल हमें

ले उड़ा फिर कोई ख़याल हमें साक़िया साक़िया सम्भाल हमें रो रहे हैं कि एक आदत है वर्ना इतना नहीं मलाल हमें ख़ल्वती हैं तेरे जमाल के हम आइने...
Ghumakkad Shastra

राहुल सांकृत्यायन – ‘घुमक्कड़ शास्त्र’

राहुल सांकृत्यायन की किताब 'घुमक्कड़ शास्त्र' से उद्धरण | Quotes from Ghumakkad Shastra, a book by Rahul Sankrityayan चयन: पुनीत कुसुम "वैसे तो गीता को बहुत...
Rahul Sankrityayan

स्‍मृतियाँ

घुमक्कड़ असंग और निर्लेप रहता है, यद्यपि मानव के प्रति उसके हृदय में अपार स्‍नेह है। यही अपार स्‍नेह उसके हृदय में अनंत प्रकार...
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