नहीं समझ आते तीज त्योहार

‘Nahi Samajh Aate Teej Tyohar’, a poem by Ritika Srivastava

तुम्हें बताया गया हर अनुष्ठान को करने का कारण
लोग करते आये हैं, तुम भी करो
होगा सब शुभ-लाभ
पूरे घर परिवार का शुभ-लाभ तुम्हारे ही हाथों में है!

त्योहारों के पीछे की कई कहानियाँ
और उनमें ख़त्म होती हुई औरतों को बताया गया
सुनो इसको करने से तुम्हरी भावनाएँ जुड़ी हुई हैं
ऐसा करने से बनी रहोगी तुम घर में अच्छी
और घर परिवार से तुम्हारे रिश्ते अच्छे बने रहेंगे
हाँ ये सब ऐसे ही करना काम है तुम्हारा
ये सब तुमको पुरुष ही नहीं, महिलाओं ने भी कहा

तुमने मान लिया कि
इन्हीं अनुष्ठानों से प्रकट होती हैं तुम्हारी भावनाएँ
और ये सब सुनकर तुमने पड़ी रहने दी हैं
अपने पैरों में बेड़ियाँ
बेलती रही हो पूरियाँ
तलती रही हो कचौड़ियाँ
दोपहर तक बनाती रहती हो तीज-त्योहार का खाना
और खाती हो तब
जब लगभग घर के सभी लोग खाना खा चुके होते हैं!

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