nayi kitaab - Anubhav Ka Munh Peechhe Hai

विवरण: कल्पना की उड़ान की जगह अनुभव की आसक्ति अधिक त्वरा के साथ पैर जमाती जा रही है। संवेदना के स्थान पर जीवन में विवेक और बुद्धि का अधिक प्रयोग हो रहा है। विचार खुलकर सामने आ रहे हैं और इसलिए संघर्ष तेज़ होता जा रहा है, जो सामाजिक न्याय की सीमा लाँघकर वैयक्तिक न्याय तक पहुँचना चाहता है। हम सब यही चाहते भी हैं कि हमारे साथ ‘न्याय’ हो, इस न्याय की कई परिभाषाएँ देश और काल पर आधारित हो सकती हैं। इस संकलन की अधिकांश कविताओं की भावभूमि भी दार्शनिकता की है।

  • Format: Hardcover
  • Publisher: Vani Prakashan (2018)
  • ISBN-10: 9387648362
  • ISBN-13: 978-9387648364

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nayi kitaab - Anubhav Ka Munh Peechhe Hai

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सहज हिन्दी, नहीं महज़ हिन्दी...