डॉ. अर्जुन तिवारी कृत ‘राष्ट्रपिता की पत्रकारिता’

विवरण:गाँधी अपने राष्ट्र की अनुपम विभूति हैं। उनको पाकर हम भारतवासी भाग्यवान हैं क्योंकि हमारे राष्ट्रपिता भारत ही नहीं पूरे विश्व में शान्ति, अहिंसा,...

अंतोन चेखव की कहानियाँ (अनुवाद: प्रमीला गुप्ता)

विवरण: अंतोन चेखव (1860-1904) की गणना न केवल रूसी साहित्य में अपितु विश्व साहित्य के शीर्ष कथाकारों में होती है। अपने छोटे से जीवन...

डॉ. मंजु ए. कृत ‘निराला की सरोज-स्मृति की काव्यशैली: एक वैज्ञानिक...

विवरण:"सूर्यकान्त त्रिपाठी निराला छायावादी कवियों में विशिष्ट हैं। निराला का काव्य व्यक्तित्व सबसे अधिक गत्यात्मक, प्रखर तथा अन्वेषी रहा है, इसका जीवन साक्ष्य प्रस्तुत...

अरुंधति राय कृत ‘एक था डॉक्टर एक था संत’

विवरण: वर्तमान भारत में असमानता को समझने और उससे निपटने के लिए, अरुंधति रॉय ज़ोर दे कर कहती हैं कि हमें राजनीतिक विकास और...

गगन गिल कृत ‘दिल्ली में उनींदे’

विवरण:इस पृथ्वी के एक जीव के नाते मेरे पास ठोस की जकड़ है और वायवीय की माया । नींद है और जाग है। सोये...

‘हमारे समय में मुक्तिबोध’ – ए. अरविंदाक्षन

विवरण:‘हमारे समय में मुक्तिबोध' मुक्तिबोध के साहित्य के पुनर्विश्लेषण की दिशा में एक सत्प्रयास है। हिन्दी के महत्त्वपूर्ण आलोचकों के आलेख इसमें संकलित हैं।...

कुसुम खेमानी कृत ‘गाथा रामभतेरी’

विवरण:‘गाथा रामभतेरी’ सर्वथा भिन्न लोक में विचरण करती है। इसमें राजस्थान की घुमन्तू-फिरन्तु जनजाति बनजारों की गाथा है और केन्द्रीय स्त्री-चरित्र है-बनजारन रामभतेरी।इस उपन्यास...

प्रभात रंजन कृत ‘पालतू बोहेमियन – मनोहर श्याम जोशी की स्मृति...

विवरण: हिंदी में ऐसे लेखक अधिक नहीं हैं जिनकी रचनाएं आम पाठकों और आलोचकों के बीच सामान रूप से लोकप्रिय हो. ऐसे लेखक और भी...

सूर्यप्रसाद दीक्षित कृत ‘छायावाद: सौ साल’

विवरण: यह छायावाद का शताब्दी वर्ष है। उसे जनमते, विकसित होते और तिरोहित होते हुए हममें से जिन लोगों ने देखा है, उन्हें पूर्वदीप्ति के...

गगन गिल कृत ‘देह की मुँडेर पर’

विवरण: हर देह एक मुँडेर है। उसकी सीमा से आगे संसार शुरू होता है। संसार, जिसका रहस्य, जिसमें अपनी उपस्थिति का आशय, हमें समझना होता...

मोहनदास नैमिशराय कृत ‘रंग कितने संग मेरे’

विवरण: वरिष्ठ लेखक मोहनदास नैमिशराय की आत्मकथा 'रंग कितने, संग मेरे'आत्मकथा लिखना अपनी ही भावनाओं को उद्वेलित करना है। अपने ही ज़ख़्मों को कुरेदने जैसा...

गगन गिल कृत ‘इत्यादि’

विवरण: हम समझते हैं, हमने एक शाम के बाद दूसरी सुबह शुरू की है, समुन्दर में हमारी नौका वहीं पर रुकी रही होगी। नौका बहते-बहते...

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