इसने नारे की हवाई छोड़ी
उसने भाषण की चर्खी
तीसरे ने योजना की महताब
चौथे ने सेमिनार का अनार
पाँचवें ने बहस के पटाखों की लड़ी
छठे ने प्रदर्शन की फुलझड़ी-
छन भर उजाले से आँखें चौंधिया गईं
पर फिर
खेल ख़त्म होते ही
और भी अदबदा कर अन्धेरे ने घेर लिया ।

भाइयो,
सहधर्मियो!
सुनो, तुम्हें मन की एक बात बतलाता हूँ-
सूरज का कोई सब्स्टीट्यूट नहीं है
यहाँ तक कि चाँद भी
जितना उजाला है
उतना वह सूरज है!

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भारतभूषण अग्रवाल
भारत भूषण अग्रवाल हिन्दी के प्रतिष्ठित साहित्यकार थे। इनके द्वारा रचित एक कविता–संग्रह 'उतना वह सूरज है' के लिये उन्हें सन् 1978 में साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

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