पहाड़ में पगडण्डियाँ
मार्ग भी होती हैं, गन्तव्य भी,
पहाड़ में होना
एक पगडण्डी पर होना है,
यहाँ गाँव भी उगता है
तो किसी पगडण्डी के डण्ठल पर

हर शाम, एक अनबूझे आनन्द में
कूद जाता है पहाड़ से नीचे सूरज
और अंधेरे में सुनायी देती है
जंगल की आवाज़
अपने पाषाणकालीन स्वरूप में

अलस्सुबह किसी पहाड़ के पीछे से
फिर उछलकर निकलता है सूरज
और पगडण्डी के रास्ते
प्रविष्ट हो जाता है
भोर का संदेस लेकर
कच्चे-पक्के मकानों में एक-सा

पगडण्डियाँ धमनियाँ और शिराएँ हैं
जिनसे गुज़रती हैं
गीले और सूखे पत्ते लाती औरतें
सब्ज़ियाँ बाज़ार ले जाते किसान
ससुराल जाती डोलियाँ
स्कूल जाते बच्चे
पलायन करते परिवार और युवक

सर्दियों में, पहाड़ पर गिरती है बर्फ़
और हफ़्ते भर नहीं पिघलती
रुक-सा जाता है जीवन का कलरव
पगडण्डियाँ, पलायन कर गयीं
एड़ियों की गर्मी चाहती हैं!

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देवेश पथ सारिया
कवि एवं गद्यकार।पुस्तकें— कविता संग्रह: 'नूह की नाव' (2021) साहित्य अकादेमी, दिल्ली से। कथेतर गद्य: 'छोटी आँखों की पुतलियों में (ताइवान डायरी)’ (2022) शीघ्र प्रकाश्य। अनुवाद: हक़ीक़त के बीच दरार (2021), वरिष्ठ ताइवानी कवि ली मिन-युंग की कविताओं का अनुवाद।उपलब्धि: ताइवान के संस्कृति मंत्रालय की योजना के अंतर्गत 'फाॅरमोसा टीवी' पर कविता पाठ एवं लघु साक्षात्कार। प्रथम कविता संग्रह का प्रकाशन साहित्य अकादेमी की नवोदय योजना के अंतर्गत।अन्य भाषाओं में अनुवाद/प्रकाशन: कविताओं का अनुवाद अंग्रेज़ी, मंदारिन चायनीज़, रूसी, स्पेनिश, बांग्ला, मराठी, पंजाबी और राजस्थानी भाषा-बोलियों में हो चुका है। इन अनुवादों का प्रकाशन लिबर्टी टाइम्स, लिटरेरी ताइवान, ली पोएट्री, यूनाइटेड डेली न्यूज़, बाँग्ला कोबिता, कथेसर, सेतु अंग्रेज़ी, प्रतिमान पंजाबी, भरत वाक्य मराठी और पोयमहंटर पत्र-पत्रिकाओं में हुआ है।साहित्यिक पत्रिकाओं में प्रकाशन: हंस, नया ज्ञानोदय, वागर्थ, कथादेश, परिकथा, कथाक्रम, पाखी, अकार, आजकल, वर्तमान साहित्य, बनास जन, मधुमती, बहुमत, अहा! ज़िन्दगी, कादंबिनी, समयांतर, समावर्तन, अक्षरा, बया, उद्भावना, जनपथ, नया पथ, कथा आदि।सम्प्रति: ताइवान में खगोल शास्त्र में पोस्ट डाक्टरल शोधार्थी। मूल रूप से राजस्थान के राजगढ़ (अलवर) से सम्बन्ध।

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