पकते गुड़ की गरम गन्ध से सहसा आया
मीठा झोंका। आह, हो गई कैसी दुनिया।
“सिकमी पर दस गुना।” सुना फिर था वही गला
सबने गुपचुप सुना, किसी ने कुछ नहीं कहा।
चूँ-चूँ बस कोल्हू की, लोहे से नहीं सहा
गया। चिलम फिर चढ़ी, “खैर, यह पूस तो चला… ”
पूरा वाक्य न हुआ कि आया खरतर झोंका
धधक उठा कौड़ा, पुआल में कुत्ता भौंका।

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नामवर सिंह
नामवर सिंह (जन्म: 28 जुलाई 1926 बनारस, उत्तर प्रदेश - निधन: 19 फरवरी 2019, नयी दिल्ली) हिन्दी के शीर्षस्थ शोधकार-समालोचक, निबन्धकार तथा मूर्धन्य सांस्कृतिक-ऐतिहासिक उपन्यास लेखक हजारी प्रसाद द्विवेदी के प्रिय शिष्‍य रहे। अत्यधिक अध्ययनशील तथा विचारक प्रकृति के नामवर सिंह हिन्दी में अपभ्रंश साहित्य से आरम्भ कर निरन्तर समसामयिक साहित्य से जुड़े हुए आधुनिक अर्थ में विशुद्ध आलोचना के प्रतिष्ठापक तथा प्रगतिशील आलोचना के प्रमुख हस्‍ताक्षर थे।

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