शान्त समय के और शान्त हो
जाने पर पानी में सपाट बादल के
बीच अनेक मुस्कानें खिलती हैं, ये कभी
स्त्रियाँ थीं जिन्हें तैरना पसन्द था
मेरी माँ के वक्ष में एक स्वप्न था

कोई अप्सरा की आयु लिए डूब गई
कोई माँस के प्रकाश में देखते-देखते डूब गई
कोई अपने सतरंगे रक्त की पुकार का असर
देखते डूब गई

सपाट बादल के एक छोर पर बैठे दार्शनिक कह
रहे हैं सब झूठ था, सब भ्रम था

उनके निकट अस्थियों पर काई उग आयी
फिर आकार बना, फिर माँस के खिलते हुए
फूल की गन्ध आयी।

Book by Rituraj:

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ऋतुराज
कवि ऋतुराज का जन्म राजस्थान में भरतपुर जनपद में सन 1940 में हुआ। उन्होंने राजस्थान विश्वविद्यालय जयपुर से अंग्रेजी में एम. ए. की उपाधि ग्रहण की। उन्होंने लगभग चालीस वर्षों तक अंग्रेजी-अध्ययन किया। ऋतुराज के अब तक के प्रकाशित काव्य संग्रहों में 'पुल पानी मे', 'एक मरणधर्मा और अन्य', 'सूरत निरत' तथा 'लीला अरविंद' प्रमुख है।