‘पीड़ा ही याद रही’ – दो कविताएँ

Poems: Manjula Bist

1

पीड़ा ही याद रही…

जिनमें भी सौन्दर्य था
वे नश्वर सिद्ध थे
पीड़ाओं में कभी सौन्दर्यबोध न था
सो वे अमर हैं!

इसीलिये ही तो
सारी तितलियों के भी जीवाश्म बेरंग पाए गए हैं
और उनके पँखों से ज़्यादा याद रह जाते हैं
शाखों पर लटके हुए उनके कसमसाते कोकून!

2

पराग-पथ

जीवन उतना ही होता है
जितना जीया जाता है
वह सम्पूर्ण व निश्चित है

जीवन लीलने हेतु
मृत्यु कभी भटकती नहीं है

आख़िर
भटकती तितली को ही तो
अपने पराग-पथ का पता मालूम था न!

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