Poems: Meena Pandey

सबसे अच्छी कविता

सबसे अच्छी कविता उतर रही थी जब
मुझे धूप में बोयाम सरकाना था, छत से उतार लाने थे ज़िम्मेदारियों के कपड़े
सारा प्रयत्न मेरा रोटियों को गोल रखने की तरफ़ रहा

रसोई, बच्चों, दुनियादारी और दफ़्तर के मध्य गढ़े गए
सबसे सुंदर विचार
बिम्ब
प्रतीक

दिन के सबसे बीहड़ क्षण, उतान्त लेटे

रेगिस्तान पसरा रहा आसपास
कविता नहीं उपजी

एकान्त में व्यूह रचे गए
सबसे अच्छी कविता जीवन के मध्य से आयी है।

माँ

बाद के दिनों में
माँ की इच्छा होगी
कोई उनके लिए भी थोड़ा माँ हो जाए
उनकी माँ के गुज़र जाने के बाद

सहला दे नींद में जाने से पहले दुखता माथा
देह की ऐंठन को तलुवों तक दबा लाए
क़रीने से लगा दे कोई बिखरी पड़ी ज़िन्दगी

पूछे ‘क्या खाने का जी है?’
उनकी जीभ को उलझाए
कोई मिलवाए उन्हें जीवन के नए कोनों से
और समय की चादरें अतीत की छतों से उतार लाए
बिन कहे आँखों में पढ़ जाए मन के मौसम कोई

बाद के दिनों में जब थक चुकी होगी माँ बस माँ होकर
कुछ बच्चे सी होने लगेगी

तब दुनियाभर के खाए-अघाए बच्चों को
माँ नहीं हो जाना चाहिए?

यह भी पढ़ें: ‘सावली लड़कियाँ भी सुन्दर होती हैं अपने गालों के सुन्दर तिल के साथ…’

Recommended Book:

Previous articleकाले ख़त का विरोध
Next articleनामचीन औरतें

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here