Poems by Mukul Amlas

होना

मैं जहाँ होती हूँ, वहाँ नहीं होती
और जहाँ नहीं होती, वहाँ होती हूँ
होता है अक्सर मेरे साथ
चाहती होता रहे ऐसा ताउम्र
यह मेरे फ़लक को देता विस्तार
मेरी कल्पनाओं को पंख
मेरी जिजीविषा को उत्साह
बस इस होनेपन में होना चाहती
यही पर्याप्त
तुम मेरा यह होना भी क्यों छीन लेना चाहते
लगाकर यह आरोप
कहाँ खोयी रहती
किसके संग?

किसके लिए

वजह-बेवजह
समय-असमय बहते ये आँसू
किसके लिए

उसके लिए जिसकी
तुम्हारे शरीर और आत्मा पर रही सदैव जमींदारी
या उन बीते दिनों के लिए जो अनमोल थे
पर गए यूँ ही सूख
ज्यों तपती किरण से ओस की बूँदें
या हैं ये आत्म कातरता का पर्याय
ख़ुद पर ही खा के तरस बहते सोच-सोच
क्यों जी ऐसी गर्हित ज़िन्दगी
जबकि थी मैं हक़दार उच्चतम को पाने की
क्यों नहीं तब समझा सकी ख़ुद को
नहीं होता मानव जीवन पर लागू
योग्यतम की उत्तरजीविता का नियम
जिनमें होता इंसानियत
जो करते प्यार
वे समझते इन आँसुओं की क़ीमत
रखते सम्भाल ज्यों हों अमूल्य मोती
अपने प्रियजन को नहीं देते इसे व्यर्थ लुटाने!

यही काफ़ी है

तुम में एक उच्चतर आत्मा वास करती
तुम्हारे कारण ज़िंदा है धरती
यहाँ जो शुभ है सुंदर है
कारण तुम हो
तुम हो सदा सृजनशील
तुम्हारा जन्म प्रेम देने के लिए हुआ
तुम हिमालय सी धवल हो, पवित्र हो
बहने दो ख़ुद से अज्रस्व दूध की गंगा
पोषण करो उनका जो देते तुम्हें मान
दोनों हाथों से बाँटो अपनी करुणा
ताकि दुनिया के दुःख कुछ कम हों
उलीचो ममता के मोती
अनाथों को मिले सहारा
पर तुम्हारे आत्म सम्मान को कोई धूल-धूसरित करे
तो मत झाड़ो उस धूल को
ज़िंदा रखो अपनी नफ़रत को
धधकने दो ज्वाला अपनी आँखों से
स्मरण रखो अपनी शक्ति रूप का
भस्म कर दो उस राक्षसी प्रवृति को
जो तुम्हें कमज़ोर समझ करते तुम्हें प्रताड़ित
जो तुम्हें निंदनीय बनाए
काट डालो उसके हाथ
तुम स्त्री हो इसलिए वंदनीय हो
और सिर्फ़ यह कारण ही काफ़ी है।

ऐसा ही कुछ पहले भी हो गुज़रा है

दोपहर की भली सी नींद के बाद
आकर बैठी जब बालकनी में
लगा ऐसा ही कुछ जिया है पहले भी
ऐसी ही कोई लहर
ऐसा ही कोई ठौर
ऐसा ही कोई पल
ऐसा ही कुछ
पता नहीं क्या
से गुजरी है ज़िंदगी
वक़्त जैसे दुबारा मुझे ढूँढता लौट आया
समय की निरंतरता पर होने लगता संशय
तब पाती- समय तो नहीं बदला
बस मैं बदल गई!

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मुकुल अमलास
जन्मस्थान: मिथिलांचल बिहार वर्तमान में नागपुर में निवास तथा स्वतंत्र लेखन में रत एक कविता संग्रह "निःशब्दता के स्वर" प्रकाशित आजकल, काव्यमंजरी, रचनाकार, अनहद कृति, जानकीपुल आदि पत्र-पत्रिकाओं में रचनाएं प्रकाशित।

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