क्षणिकाएँ

स्मृतियाँ, आग

Poems: Harshita Panchariya स्मृतियाँ देह के संग्रहालय में स्मृतियाँ अभिशाप हैं और यह जानते हुए भी मैं स्मृतियों की शृंखला जोड़ने में लगी हूँ सम्भवतः 'जोड़ने की कोशिश' तुम्हें भुलाने की क़वायद में एकमात्र...

परिभाषा

'Paribhasha', short poems by Namrata 1 सम्भावना एक अमिट दाग़ है निर्बल मन में गहरे धँसी हुई प्रतीक्षा के साइन बोर्ड के साथ। 2 प्रतीक्षा एक वाहक है नैराश्य व आशान्वित के मध्य प्रतिद्वंद्विता के परिणाम की। 3 आशा एक दमनकारी...

क्षणिकाएँ

Short Poems: Harshita Panchariya 'जीवन का सबसे बड़ा भ्रम है स्वयं को जीवित समझना' और 'जीवन का सबसे बड़ा श्रम है स्वयं को जीवित रखना' के अंतर में एक सदी जितनी दूरी...

किसान – पन्द्रह लघु कविताएँ

Poems: Pratap Somvanshi एक एक ऐसा बकरा जिसे पूरा सरकारी अमला काटता खाता सेहत बनाता है और वह दूसरों के लिए चारा उगाता है चारा बन जाता है दो कुनीतियों की डायन अपने ही बच्चे खाती...

क्षणिकाएँ

Short Poems: Harshita Panchariya 1 मंदिरों की घण्टियाँ और मस्जिदों की अज़ान इस बात का प्रमाण हैं कि ईश्वर बहरा है ईश्वर का बहरा होना उसके अंधे होने से ज़्यादा बेहतर है ताकि...

क्षणिकाएँ

नक़्शे भूगोल की कक्षा में अव्वल आई लड़की, बनाती है नक़्शे कई देशों के और उन्हें तवे पर सेक देती है। चाहतें औरत ढूँढ रही है साथ देने वाला आदमी उस समाज में जहाँ आदमी सिर्फ़...

लघु कविताएँ

Poems: Nutan Gupta समय-बोध अश्वारूढ़ होकर चलने का तात्पर्य यह कभी नहीं है कि तुम्हें ठोकर लग ही नहीं सकती, वायु वेग से चलने वाले अश्व भी कभी-कभी धड़ाम हो जाते हैं। अतिरेक मैंने ऐसे...

शब्द और मौन

'Shabd Aur Maun', Short Hindi Poems by Harshita Panchariya बचाकर रखिए अपने शब्दों को इसलिए नहीं कि शब्दों के हाथ-पैर नहीं होते बल्कि इसलिए कि शब्दों से लम्बी लोगों की...

क्षणिकाएँ: ‘प्रेम’

Short Poems on Love by Harshita Panchariya 1 मेरा प्रेम तुम्हारे लिए बिल्कुल उस बीज के जैसा है जिसे रोशनी से डर लगता है। हमारा प्रेम पनप जाए, इसलिए उसे...

क्षणिकाएँ

Poems: Harshita Panchariya सहनशीलता उबलते हुए दूध पर ज़रा सी फूँक मारकर खौलने से बचाने वाली औरतें अक्सर बचा लेती है स्त्री जाति का सर्वोत्तम गहना। नव-सृजन सभ्यता के विकास की शृंखला में एक दिन संसार की समस्त स्त्रियों को भाषा में परिवर्तित...

क्षणिकाएँ

प्रेम दो प्रेमी मिले, बिछड़कर फिर मिल गए जैसे कि होंठ 'प्रेम' का उच्चारण करते समय! नींद और ख़्वाब एक-दूसरे से कुछ ही दूर पर खड़े नींद और ख़्वाब लेकिन आज तक न...

अभिलाषा, पहचान, युद्ध

Poems: Harshita Panchariya अभिलाषा माँगो तो मनोकामनाओं के अंतिम अध्याय में अपूर्ण रहने का वर माँग लेना क्योंकि अनेक सम्भावनाओं का ठौर इतना सहज कहाँ? पहचान पहचानी जाऊँगी तो संसार की उस मूर्ख स्त्री...

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