मोड़ोगे मन
या सावन के घन मोड़ोगे?
मोड़ोगे तन
या शासन के फन मोड़ोगे?
बोलो साथी! क्या मोड़ोगे?

तोड़ोगे तृण
या धीरज धारण तोड़ोगे?
तोड़ोगे प्रण
या भीषण शोषण तोड़ोगे?
बोलो साथी! क्या तोड़ोगे?

जोड़ोगे कन
या विश्वासी मन जोड़ोगे?
जोड़ोगे धन
या मेधावी जन जोड़ोगे?
बोलो साथी! क्या जोड़ोगे?

केदारनाथ अग्रवाल की कविता 'मज़दूर का जन्म'

Book by Kedarnath Agarwal: