जयन्तियाँ मनाते
या शोकसभाएँ करते
बीतती है हमारी ज़िन्दगी
या तो हम परीक्षाएँ लेते हैं
या देते हैं…

स्वागत अथवा विदाई
सम्वादअथवा विवाद
हमारी ज़िन्दगी के पर्याय है।
मित्रों! हम ऐसे यात्री हैं
जिनके गले में
फूल मालाएँ नही
मृत चिड़ियाएँ अटकी हैं
कब तक
आखिर कब तक
अपने आप को नकारने का
नाटक करें…?

ऐसे ही बीतती है
हमारी ज़िन्दगी
गर्वोक्तियाँ करते
या दुलत्तियाँ झाड़ते।

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