जीवन में उत्सव

मौत हमेशा से मुझे बेहद रोचक जान पड़ी है। बचपन में जब पहली बार अपने एक फूफाजी की मौत की ख़बर सुनी तो चुप...

अनघ प्रेम

धरती सूखकर रूठ जाती है। आसमान, घबरा उठता है अपनी प्यारी धरती के रूठने पर। क्षितिज पर आसमान को धरती के दिल पर सिर रखकर रोते...

बह जाने का डर

मैं पानी का बहना देख रहा हूँ। पानी अपने साथ कितने सपने, यादें और न जाने कितनी गतियाँ बहाये लिये जा रहा है। इसके...

एक तरफा प्रेम

एकतरफा प्रेम उस पौधे की तरह है जिसे पोषित करके स्वयं ही उसकी हत्या करनी पड़ जाए या स्वयं की। प्रेम की हत्या क्या सम्भव है? वास्तव...

नींद का उचटना

"कभी-कभी दर्द दरिया नहीं होता, एक क़तरा भर होता है। किसी लेटे हुए ख़्याल की आँख से लुढ़ककर तकिये के गाल पर जा टपकता है।" "ये मुहब्बत का वो महीना है जिसमें हवा बदतमीज़ हो जाती है। रात पूरी हो जाती है और मौसम की बेवफ़ाई से आहत सुबह कहीं छुप जाती है।"

दूरियाँ

"जमाना जिसे ग़ुमराही कहता है, पाँवों को रौंदता हुआ दिल उसे सुकून कहता है।" "किसी छत की सीढ़ियों से जब कोई बच्चा तेज़ी से उतरता है तो दिल दहलता है और मुँह से डाँट और हिदायतें निकलती हैं। शायद सब ऐसे ही सीखते हैं। छत से फ़र्श तक की दूरी दहलते-दहलाते पूरी कर ही ली जाती है, कभी चोट खाकर, कभी यूँ ही। सबको ख़बर होती है कि लौटकर फ़र्श पर आना ही है।"

माफ़ीनामा

"फ़ोन हाथ में था और नम्बर ज़हन में, डायल किया, सोचा, नाहक़ दिल दुखाया, मना लूँ। कैसा लगता है जब हम अपनी ग़लतियों की मुआफ़ी के लिए सर पटकने के लिए कोई पत्थर ढूंढ़ रहे होते हैं, तब कोई लम्हा हमारी ख़िलाफ़त करता हुआ हमारे हाथ में एक पत्थर थमा के चला जाता है। हम पत्थर को सिर पर मारना भूलकर किसी और की तरफ़ फेंक देते हैं। ऐसा होता है, मगर क्यों होता है?"

लास्ट पेज नोट्स

मैं कभी मुतमईन महसूस नहीं करता। पहले सोचता था और परेशान रहता था कि क्यूँ? लेकिन अब शायद अंदाज़ा है कि ये बेचैनी जो हर...

जीवन मानो एक दावत हो

Excerpts from 'The Enchiridion' by Epictetus जीवन मानो एक दावत हो जीवन को इस तरह ग्रहण करें मानो वह एक दावत हो जिसमें आपको शालीनता के...

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Couple, Silhouette

आख़िरी बार मिलो

आख़िरी बार मिलो ऐसे कि जलते हुए दिल राख हो जाएँ कोई और तक़ाज़ा न करें चाक-ए-वादा न सिले, ज़ख़्म-ए-तमन्ना न खिले साँस हमवार रहे, शमा की लौ...
Yellow Flower, Offering, Sorry, Apology

वहाँ देखने को क्या था

मैं उन इलाक़ों में गया जहाँ मकान चुप थे उनके ख़ालीपन को धूप उजला रही थी हवा शान्त, मन्थर— अपने डैने चोंच से काढ़ने को बेचैन थी लोग जा चुके हैं उन्हें कुछ...
River

नदी

1 घर से निकलकर कभी न लौट पाने का दुःख समझने के लिए तुम्हें होना पड़ेगा एक नदी! 2 नदियों की निरन्तरता को बाँध उनका पड़ाव निर्धारित कर मनुष्य ने देखा है ठहरी हुई नदियों...
Maya Angelou

माया एंजेलो की कविता ‘उदित हूँ मैं’

माया एंजेलो की कविता 'And Still I Rise' का अनुवाद कड़वे छली मृषा से इतिहास में तुम्हारे तुम्हारी लेखनी से मैं न्यूनतम दिखूँगी धूल-धूसरित भी कर सकते...
Sandeep Nirbhay

मुसलमानों की गली

आज वह शहर की उस गली में गया जहाँ जाने से लोग अक्सर कतराते हैं पान की गुमटी में बैठी एक बुढ़िया पढ़ रही है उर्दू की...
Farmers

मेरे पुरखे किसान थे

मेरे पुरखे किसान थे मैं किसान नहीं हूँ मेरी देह से खेत की मिट्टी की कोई आदिम गन्ध नहीं आती पर मेरे मन के किसी पवित्र स्थान पर सभी पुरखे जड़...
Anurag Anant

तुम्हारे कंधे से उगेगा सूरज

तुम्हारी आँखें मखमल में लपेटकर रखे गए शालिग्राम की मूरत हैं और मेरी दृष्टि शोरूम के बाहर खड़े खिलौना निहारते किसी ग़रीब बच्चे की मजबूरी मैंने जब-जब तुम्हें देखा ईश्वर अपने अन्याय...
Two Indian Women standing

बहनें

कोयला हो चुकी हैं हम बहनों ने कहा रेत में धँसते हुए ढक दो अब हमें चाहे हम रुकती हैं यहाँ तुम जाओ बहनें दिन को...
Jaun Elia

समझ में ज़िन्दगी आए कहाँ से

समझ में ज़िन्दगी आए कहाँ से पढ़ी है ये इबारत दरमियाँ से यहाँ जो है तनफ़्फ़ुस ही में गुम है परिंदे उड़ रहे हैं शाख़-ए-जाँ से मकान-ओ-लामकाँ के...
Abstract, Head, Human

मेरी आवाज़, भेद का भाव

मेरी आवाज़ बचपन से कोशिश जारी है पर अब तक पहाड़ के पार मेरी आवाज़ नहीं जाती पहले गूँजती थी और लम्बी यात्रा कर टकराकर लौट आती थी पहाड़ के इस...
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