‘Pul’, Hindi Kavita by Rahul Boyal

वह एक अभियन्ता था
पुल बनाने में उसको महारथ हासिल थी
भवनों की डिज़ायन तो वह ऐसी तैयार करता था
कि आदमी भौचक्का हुआ फिरे
पर उसने नहीं बनाया एक भी पुल
जिससे कोई प्रेमी पहुँच सके अपनी प्रेमिका तक
एक किनारे का आदमी दूसरे किनारे के आदमी से जुड़ सके
वह एक चिकित्सक भी होता
तो ज़्यादा से ज़्यादा कर सकता था अंग प्रत्यारोपण
वह मुर्दे में जान डालने के क़ाबिल भी हो सकता था
मगर पुल बनाने की क़ुव्वत वह शायद ही जुटा पाता

जब अकेलापन मेरी नसों में दौड़ने लगा
मैंने कविताओं को तूल दिया
जब प्यार मेरी आत्मा को झिंझोड़ने लगा
मैंने काग़ज़ को फूल दिया
जिन लोगों ने मेरी तारीफ़ों के पुल बाँधे
वो मेरी कविताओं के ठेकेदार निकले
जिन लोगों ने मेरी आलोचनाओं के शब्द गढ़े
एक दिन वो अपने ही कहे से मुकर चले
कुछ लोग ख़ामोश थे, जो काम कर रहे थे
शायद वही पुल बनाने का काम कर रहे थे
जिसकी डिज़ायन मैंने अपनी कविताओं में तैयार की थी।

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राहुल बोयल
जन्म दिनांक- 23.06.1985; जन्म स्थान- जयपहाड़ी, जिला-झुन्झुनूं( राजस्थान) सम्प्रति- राजस्व विभाग में कार्यरत पुस्तक- समय की नदी पर पुल नहीं होता (कविता - संग्रह) नष्ट नहीं होगा प्रेम ( कविता - संग्रह) मैं चाबियों से नहीं खुलता (काव्य संग्रह) ज़र्रे-ज़र्रे की ख़्वाहिश (ग़ज़ल संग्रह) मोबाइल नम्बर- 7726060287, 7062601038 ई मेल पता- rahulzia23@gmail.com