42 सैनिकों के
जिस्म से निकला गर्म लाल खून
जो सड़कों पर बिखरा पड़ा है
माँस के लोथड़ों और क्षत विक्षत अंगों से पटी सड़क
गवाह है कि तुम हाँ तुम सब ही
और तुम्हारे नेता
जिम्मेदार है इन मौतों के
जो कभी तलाश ही नहीं पाए
कश्मीर और आतंकवाद का हल

पर कुछ न तलाश लेंगे लोग
कोई तलाश रहा होगा
इस घटना पर फ़िल्म
कोई देख रहा होगा सियासत का नया दाँव
कोई अनुपात लगा रहा होगा वोटों का
कोई तलाशेगा धर्म
और तलाशेगा शहीदों की जाति

निंदा, नमन और गर्व के तुम्हारे इन चुटकुलों
से नहीं लौटने वाली
वो 42 जानें
उन 42 परिवारों के
बच्चों, माओं
बाप, भाई और
बहनों
की रंगीन जिंदगी
हो गयी है बेरंग

धीरे धीरे सब हो जाएगा सामान्य
खत्म हो जाएगा शोक
फिर कोई सिरफिरा आकर
लाल कर जाएगा हमारी जमीनें
सूनी होंगी माओं की गोद
पत्नियों की माँग
पिता और बच्चों का
सहारा खत्म हो जाएगा
हमेशा हमेशा के लिए..

सब इसी तरह चलता रहेगा
तुम सब करते रहोगे राजनीति
और सियासत
नमन और श्रद्धांजलि के चुटकुलों से
जी भर जाए तो अपने-अपने खादी कुर्ते
वाले बापों से पूँछ लेना सवाल और माँगना जवाब
ताकि आइंदा फिर कभी कोई बाप न खोए अपना बेटा
और बेटा न खोए अपना बाप…

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अभय कुमार
अभी सीख ही रहा हूँ...

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