गीत चतुर्वेदी के ‘सबद’ पर प्रकाशित कॉलम से कुछ चुनिंदा उद्धरण | Geet Chaturvedi Quotes

 

“नींद, मृत्यु का दैनिक अभ्यास है।”

 

“हम जब तक किसी को याद करते रहते हैंतब तक उसकी मृत्यु नहीं होती।”

 

“कविता ही हमारी आत्मा हैतो इस तरह भी कह सकते हैं कि जब तक हमारे भीतर कविता हैमृत्यु हमारा कुछ भी नहीं बिगाड़ पाएगी।”

 

“प्रेम क्या होता है? ज़मीन में आधा दफ़न, लहराता हुआ दुपट्टा ही तो होता है।”

 

“हर उपन्यास एक यात्रा-वृत्तांत है। आत्म की खोज की यात्रा का वृत्तांत। यात्रा एक ही है, वृत्तांत भी एक ही, लेकिन खोज दो हैं। एक, लेखक द्वारा की जाने वाली आत्म की खोज। दूसरे, पाठक द्वारा की जाने वाली आत्म की खोज। दोनों खोजों में औज़ार एक ही प्रयुक्त होता है।”

 

“कई किताबें पूरी होने से पहले ही ख़त्म हो जाती हैं।”

 

“श्रेष्ठ कलाएँ कभी पूर्णता की दौड़ नहीं दौड़तीं।”

 

“कविता के लिए तथ्यानुयायी नहींहृदयानुयायी होना ज़रूरी है।”

 

“हर समय पॉलिटिकली करेक्ट होने का हठ भी महान विपदाएँ ले आता है।”

 

“जिसकी अनुपस्थिति में भी तुम जिससे मानसिक सम्वाद करते हो, उसके साथ तुम्हारा प्रेम होना तय है।”

 

“आदर्श पाठक जैसी कोई चीज़ नहीं होती, जैसे आदर्श कविता नहीं हो सकती, आदर्श साहित्य नहीं हो सकता, आदर्श मनुष्य नहीं हो सकता।”

 

“हमारा हृदय एक पिरामिड है। मरे हुए लोग अपने पूरे साज़ो-सामान के साथ इसमें सुरक्षित रहते हैं- उनके चेहरे नहीं बदलते, उनके कपड़े, गहने, किताबें, उनकी बातें, आदतें, उनके ठहाके, उनकी बेचैनी- हमारे दिल में इन सबकी ममी रहती है।”

 

“किताब का पूरा होना एक छोटी मृत्यु जैसा है।”

 

“जिन लेखकों का नाम सबसे ज़्यादा बार लिया जाता है, दरअसल, उन्हें बहुत कम पढ़ा जाता है।”

 

“आईने ईश्वर द्वारा भेजे गए जासूस हैं।”

 

यह भी पढ़ें: गौरव सोलंकी की किताब ‘ग्यारहवीं ए के लड़के’ से उद्धरण

Books by Geet Chaturvedi:

 

Previous articleउठे तिरी महफ़िल से तो किस काम के उठ्ठे
Next articleअर्थ-विवशता
गीत चतुर्वेदी
गीत चतुर्वेदी का जन्म 27 नवम्बर 1977 को मुम्बई में हुआ। उनके तीन कविता-संग्रह 'ख़ुशियों के गुप्तचर' (2019), 'न्यूनतम मैं' (2017) और 'आलाप में गिरह' (2010) प्रकाशित हैं। लम्बी कहानियों की दो किताबें 'सावंत आंटी की लड़कियाँ' व 'पिंक स्लिप डैडी' भी आ चुकी हैं। उन्हें कविता के लिए भारत भूषण अग्रवाल पुरस्कार, गल्प के लिए कृष्ण प्रताप कथा सम्मान मिल चुके हैं। ‘इण्डियन एक्सप्रेस’ सहित कई प्रकाशन संस्थानों ने उन्हें भारत के सर्वश्रेष्ठ लेखकों में शुमार किया है। उनकी रचनाएँ देश-दुनिया की सत्रह भाषाओं में अनूदित हो चुकी हैं।