रॉबर्ट फ़्रॉस्ट

रॉबर्ट फ़्रॉस्ट के हिन्दी उद्धरण | Robert Frost Quotes in Hindi   "कवि होना एक अवस्था है; वृत्ति नहीं।" अनुवाद: आदर्श भूषण

मधु कांकरिया

मधु कांकरिया के उद्धरण | Madhu Kankariya Quotes   "अपराधबोध आसमान में उड़ती वह काली चील होती है जो आपके ज़रा-सा ख़ाली होते ही झपट्टा मार...

हरिशंकर परसाई

हरिशंकर परसाई के उद्धरण | Harishankar Parsai Quotes   'पवित्रता का दौरा' से "पवित्रता की भावना से भरा लेखक उस मोर जैसा होता है जिसके पाँव में...

भीष्म साहनी

भीष्म साहनी के उद्धरण | Quotes by Bhisham Sahni   "ईमानदार आदमी क्यों इतना ढीला-ढाला होता है, क्यों सकुचाता-झेंपता रहता है, यह बात कभी भी मेरी...

गौरव सोलंकी – ‘ग्यारहवीं ए के लड़के’

Gaurav Solanki Quotes from 'Gyarahvin A Ke Ladke'   "आधी बातें बिना सुने भी जीवन उसी तरह जिया जा सकता था।"   "सबका ज़ोर हमें मुहावरें, लोकोक्तियाँ, व्याकरण...

मुश्ताक़ अहमद यूसुफ़ी

मुश्ताक़ अहमद यूसुफ़ी के उद्धरण| Mushtaq Ahmad Yusufi Quotes in Hindi   "दुश्मनी के लिहाज़ से दुश्मनों के तीन दर्जे होते है— दुश्मन, जानी दुश्मन और...

खलील जिब्रान

Kahlil Gibran Quotes in Hindi   "दानशीलता यह नहीं है कि तुम मुझे वह वस्तु दे दो, जिसकी मुझे आवश्यकता तुमसे अधिक है, बल्कि यह है...

रोबेर्तो बोलान्यो

रोबेर्तो बोलान्यो के उद्धरण | Roberto Bolaño Quotes in Hindi अनुवाद: पुनीत कुसुम "अगर आप वही कहने जा रहे हैं जो आप कहना चाहते हैं, तो...

व्लादिमीर नबोकॉफ़

व्लादिमीर नबोकॉफ़ के उद्धरण | Vladimir Nabokov Quotes in Hindi अनुवाद: पुनीत कुसुम   "हमारी कल्पना उड़ान भरती है... और हम धरती पर उसकी छाया हैं।"   "साहित्य...

राहुल सांकृत्यायन – ‘घुमक्कड़ शास्त्र’

"वैसे तो गीता को बहुत नई बोतल में पुरानी शराब और दर्शन तथा उच्‍च धर्माचार के नाम पर लोगों को पथभ्रष्‍ट करने में ही...

महादेवी वर्मा – ‘ठकुरी बाबा’

महादेवी वर्मा के रेखाचित्र 'ठकुरी बाबा' से उद्धरण | Mahadevi Verma Quotes from 'Thakuri Baba' in Hindi   "मेरे संकल्प के विरुद्ध बोलना उसे और अधिक...

विश्व साहित्यकारों के कुछ चुनिंदा उद्धरण

"उसका हाथ थामना ऐसा था जैसे किसी तितली को पकड़ना या फिर धड़कनों को थाम लेना सम्पूर्ण और जीवंत..." - रेनबो रॉवेल   "उंगली पर गिने जा सके...

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Mahesh Anagh

नहीं-नहीं, भूकम्प नहीं है

नहीं नहीं, भूकम्प नहीं है नहीं हिली धरती। सरसुतिया की छान हिली है कागा बैठ गया था फटी हुई चिट्ठी आयी है ठनक रहा है माथा सींक सलाई हिलती है सिंदूर माँग...
Adil Mansuri

सियाह चाँद के टुकड़ों को मैं चबा जाऊँ

सियाह चाँद के टुकड़ों को मैं चबा जाऊँ सफ़ेद सायों के चेहरों से तीरगी टपके उदास रात के बिच्छू पहाड़ चढ़ जाएँ हवा के ज़ीने से तन्हाइयाँ...
Nirmala Putul

तुम्हें आपत्ति है

तुम कहते हो मेरी सोच ग़लत है चीज़ों और मुद्दों को देखने का नज़रिया ठीक नहीं है मेरा आपत्ति है तुम्हें मेरे विरोध जताने के तरीक़े पर तुम्हारा मानना है कि इतनी...
Ishrat Afreen

मेनोपॉज़

अजीब-सी इत्तिला थी वो जिसे मैं ख़ुद से न जाने कब से छुपा रही थी अजब ख़बर थी कि जिसकी बाबत मैं ख़ुद से सच बोलते हुए...
Safia Akhtar, Jaan Nisar Akhtar

सफ़िया का पत्र जाँ निसार अख़्तर के नाम

भोपाल, 15 जनवरी, 1951 अख़्तर मेरे, पिछले हफ़्ते तुम्हारे तीन ख़त मिले, और शनीचर को मनीआर्डर भी वसूल हुआ। तुमने तो पूरी तनख़्वाह ही मुझे भेज दी... तुम्हें...
God, Mother, Abstract

पेटपोंछना

दराज़ में रखी नींद की गोलियों से भरी शीशी को मैंने फिर से देखा, थोड़ी देर देखता रहा... फिर धीरे से दराज़ बंद कर दी।...
Alok Dhanwa

भागी हुई लड़कियाँ

1 घर की ज़ंजीरें कितना ज़्यादा दिखायी पड़ती हैं जब घर से कोई लड़की भागती है क्या उस रात की याद आ रही है जो पुरानी फ़िल्मों में बार-बार आती थी जब...
Harivanshrai Bachchan

प्रश्न मेरे, उत्तर बच्चन के

साक्षात्कार: हरिवंशराय बच्चन (बच्चन रचनावली खंड 9 से) साक्षात्कारकर्ता: कुमारी विभा सक्सेना, 1979 प्रश्न— आपने अपनी आत्मकथा के प्रथम भाग 'क्या भूलूँ क्या याद करूँ' में...
Amarkant

एक थी गौरा

लम्बे क़द और डबलंग चेहरे वाले चाचा रामशरण के लाख विरोध के बावजूद आशू का विवाह वहीं हुआ। उन्होंने तो बहुत पहले ही ऐलान...
Dagh Dehlvi

तुम्हारे ख़त में नया इक सलाम किसका था

तुम्हारे ख़त में नया इक सलाम किसका था न था रक़ीब तो आख़िर वो नाम किसका था वो क़त्ल करके मुझे हर किसी से पूछते हैं ये...
Woman, River

यह नदी

यह नदी रोटी पकाती है हमारे गाँव में। हर सुबह नागा किए बिन सभी बर्तन माँजकर, फिर हमें नहला-धुलाकर नैन ममता आँजकर यह नदी अंधन चढ़ाती है हमारे गाँव में। सूखती-सी क्यारियों में फूलगोभी बन हँसे, गंध धनिए में सहेजे, मिर्च...
Murdahiya - Tulsiram

तुलसीराम: ‘मुर्दहिया’ व ‘मणिकर्णिका’

मुर्दहिया "हम अंजुरी मुँह से लगाए झुके रहते, और वे बहुत ऊपर से चबूतरे पर खड़े-खड़े पानी गिराते। वे पानी बहुत कम पिलाते थे किंतु...
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अरे कहीं देखा है तुमने

अरे कहीं देखा है तुमने मुझे प्यार करने वालों को? मेरी आँखों में आकर फिर आँसू बन ढरने वालों को? सूने नभ में आग जलाकर यह सुवर्ण-सा हृदय गलाकर जीवन-संध्या...
Dushyant Kumar

साहित्य सत्ता की ओर क्यों देखता है?

यह एक अजीब बात है कि इधर साहित्यकार में शिकवों और शिकायतों का शौक़ बढ़ता जा रहा है। उसे शिकायत है कि गवर्नर और...
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मनुष्यता की होड़

ग्रीष्म से आकुल सबसे ज़्यादा मनुष्य ही रहा ताप न झेला गया तो पहले छाँव तलाशी फिर पूरी जड़ से ही छाँव उखाड़ ली विटप मौन में अपनी हत्या के मूक साक्षी...
Om Prakash Valmiki

तब तुम क्या करोगे?

यदि तुम्हें धकेलकर गाँव से बाहर कर दिया जाए पानी तक न लेने दिया जाए कुएँ से दुत्कारा-फटकारा जाए चिलचिलाती दोपहर में कहा जाए तोड़ने को पत्थर काम के बदले दिया जाए खाने...
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ज़िन्दगी से डरते हो

ज़िन्दगी से डरते हो! ज़िन्दगी तो तुम भी हो, ज़िन्दगी तो हम भी हैं! ज़िन्दगी से डरते हो? आदमी से डरते हो आदमी तो तुम भी हो, आदमी...
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चंदन गंध

चंदन है तो महकेगा ही आग में हो या आँचल में छिप न सकेगा रंग प्यार का चाहे लाख छिपाओ तुम, कहने वाले सब कह देंगे कितना ही भरमाओ...
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मूल अधिकार?

क्या कहा—चुनाव आ रहा है? तो खड़े हो जाइए देश थोड़ा बहुत बचा है उसे आप खाइए। देखिए न, लोग किस तरह खा रहे हैं सड़के, पुल और फ़ैक्ट्रियों तक को पचा...
Jyotsna Milan

रात

सबसे पहले शुरू होता है माँ का दिन मुँह अंधेरे और सबके बाद तक चलता है छोटी होती हैं माँ की रातें नियम से और दिन नियम से लम्बे रात में दूर तक...
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