रवीन्द्रनाथ टैगोर के उद्धरण | Rabindranath Tagore Quotes in Hindi

 

“तथ्य कई हैं, लेकिन सच एक ही है।”

 

“प्रत्येक शिशु यह सन्देश लेकर आता है कि ईश्वर अभी मनुष्यों से निराश नहीं हुआ है।”

 

“सिर्फ़ खड़े होकर पानी को ताकते रहने से आप समुद्र को पार नहीं कर सकते।”

 

“हमेशा तर्क करने वाला दिमाग़, धार वाला वह चाकू है जो प्रयोग करने वाले के हाथ से ही ख़ून निकाल देता है।”

 

“फूल की पंखुड़ियों को तोड़कर आप उसकी सुन्दरता को प्राप्त नहीं करते।”

 

“जिस तरह घोंसला सोती हुई चिड़िया को आश्रय देता है, उसी तरह मौन तुम्हारी वाणी को आश्रय देता है।”

 

“मित्रता की गहराई, परिचय की लम्बाई पर निर्भर नहीं करती।”

 

“जो कुछ हमारा है, वह हम तक तभी पहुँचता है जब हम उसे ग्रहण करने की क्षमता विकसित करते हैं।”

 

“हर एक कठिनाई जिससे आप मुँह मोड़ लेते हैं, एक दिन भूत बनकर आपकी नींद में बाधा डालेगी।”

 

“वे लोग जो अच्छाई करने में बहुत ज़्यादा व्यस्त होते है, स्वयं अच्छा होने के लिए समय नहीं निकाल पाते।”

 

“यदि आप सभी ग़लतियों के लिए दरवाज़े बन्द कर देंगे तो सच बाहर रह जायेगा।”

 

“कट्टरता सच को उन हाथों में सुरक्षित रखने की कोशिश करती है जो उसे मारना चाहते हैं।”

 

“प्रेम अधिकार का दावा नहीं करता, बल्कि स्वतन्त्रता प्रदान करता है।”

 

“संगीत दो आत्माओं के बीच के अन्तर को भरता है।”

 

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रवीन्द्रनाथ टैगोर
रवीन्द्रनाथ टैगोर (7 मई, 1861 – 7 अगस्त, 1941) को गुरुदेव के नाम से भी जाना जाता है। वे विश्वविख्यात कवि, साहित्यकार, दार्शनिक और भारतीय साहित्य के नोबल पुरस्कार विजेता हैं। बांग्ला साहित्य के माध्यम से भारतीय सांस्कृतिक चेतना में नयी जान फूँकने वाले युगदृष्टा थे। वे एशिया के प्रथम नोबेल पुरस्कार सम्मानित व्यक्ति हैं। वे एकमात्र कवि हैं जिसकी दो रचनाएँ दो देशों का राष्ट्रगान बनीं - भारत का राष्ट्र-गान जन गण मन और बाँग्लादेश का राष्ट्रीय गान आमार सोनार बाँग्ला गुरुदेव की ही रचनाएँ हैं।