राम तुमने ठीक नहीं किया
रावण को मारा,
विभीषण को राज्य दिया
ठीक नहीं किया।
अब देखो ना!
हर विभीषण अपने घर का
भेद बताए बैठा है,
लंका पर होगा राज उसका
इस आस में अपना घर ढाये बैठा है।
यूँ तो तुम्हारे जाने के बाद भी
मार दिया जाता है रावण को
हर दशहरे,
जला दिया जाता है
कुम्भकरण और मेघनाथ को।
पर विभीषण नहीं मरता।
वो जीता ही रहता है,
मुझमें और तुम में भी,
जिस वृक्ष की डालियाँ
आज घोंट रही हैं गला पूरे देश का,
उसका बीज बोकर
तुमने ठीक नहीं किया।
तुमने ठीक नहीं किया राम
तुमने ठीक नहीं किया।

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सुप्रिया मिश्रा
हिन्दी में कविताएं लिखती हूँ। दिल से एक कलाकार हूँ, साहित्य और कला के क्षेत्र में नया सीखने और जानने की जागरूकता बनाए हुए हूँ।

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