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धनिकों के तो धन हैं लाखों

धनिकों के तो धन हैं लाखों मुझ निर्धन के धन बस तुम हो! कोई पहने माणिक माल कोई लाल जुड़ावे कोई रचे महावर मेहँदी मुतियन माँग भरावे सोने वाले, चाँदी वाले पानी...

जाँघों के बीच

कल अरसे बाद उसके वहाँ गया था महाजन गाँव की मटकी का ठण्डा पानी पीते वक़्त सुनायी दी मुझे हारमोनियम की मीठी आवाज़ और धौंकनी चला रहे हाथ से आ...

मैं अपने मरने के सौन्दर्य को चूक गया

एक औरत मुजफ़्फ़रपुर जंक्शन के प्लेटफ़ार्म पर मरी लेटी है उसका बच्चा उसके पास खेल रहा है बच्चे की उम्र महज़ एक साल है एक औरत की गोद में...

विश्व भर की हलचलें

विश्व भर की हलचलें गहरे तिमिर में खो गयीं! पड़ गया हरियालियों का रंग कुछ-कुछ साँवला, भौंर की मधु बाँसुरी का स्वर कहीं लय हो गया, बालपन...

गणित

दादी सास को गुज़रे महीने-भर से ऊपर हो गया था... वो‌ बात अलग थी कि लॉकडाउन में फँसे होने के कारण इतने दिनों बाद...

प्रतीक्षा

चुप क्यों हो संगी? कुछ तो कहो! पैरों के नीचे धरती के अन्दर कोयले के अन्तस में छुपी आग के बावजूद इतनी ठण्डी क्यों है तुम्हारी देह? झारखण्ड की विशाल पट्टिकाओं में रेंगते ताम्बे...

राम दयाल मुण्डा की कविताएँ

सूखी नदी/भरी नदी सूखी नदी एक व्यथा-कहानी जब था पानी तब था पानी! भरी नदी एक सीधी कहानी ऊपर पानी, नीचे पानी। विरोध उसे बाँधकर ले जा रहे थे राजा के सेनानी और नदी छाती पीटकर...

मैं आज़ाद हुई हूँ

खिड़कियाँ खोल दो शीशे के रंग भी मिटा दो परदे हटा दो हवा आने दो धूप भर जाने दो दरवाज़ा खुल जाने दो मैं आज़ाद हुई हूँ सूरज आ गया है मेरे कमरे में अन्धेरा...

दंगा-फ़साद

अनुवाद: पद्मजा घोरपड़े जातीय दंगा-फ़साद की गोलाबारी में मर गये मेरे बाप की लाश उठाते हुए मुझे लगा मेरा ही विभाजन हो गया है देश से! मुख्यमन्त्री निधि से मिला...

दुःख की बात

निरर्थकताओं को सार्थकताओं में बदलने के लिए हम संघर्ष करते हैं बदहालियों को ख़ुशहालियों में बदलने के लिए हम संघर्ष करते हैं क्योंकि कमियाँ जब अभाव बन जाती...

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