जिन्हें धक्का मारना था,
उन्हें अपनी तरफ़
रहा खींचता

जो बने थे
खुल जाने के लिए
खींचने से,
उन्हें धकेलता रहा
अपने से दूर

लोग दरवाज़े थे
और मैं
साइन बोर्ड पढ़ने में अक्षम
अनपढ़, अल्हड़!

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देवेश पथ सारिया
हिन्दी कवि-गद्यकार एवं अनुवादक। पुरस्कार : भारतभूषण अग्रवाल पुरस्कार, स्नेहमयी चौधरी सम्मान। प्रकाशित पुस्तकें : (कविता संकलन) : अदृश्य आत्मीय की टोह में (2025), नूह की नाव (2022)। (कहानी संग्रह) : स्टिंकी टोफू (2025)। (कथेतर गद्य) : छोटी‌ आँखों की पुतलियों में (2022)। (अनुवाद) : यातना शिविर में साथिनें (2023), हक़ीक़त के बीच दरार (2021)। संपादन : गोल चक्कर वेब पत्रिका। अंग्रेज़ी, स्पेनिश, मंदारिन, रूसी, नेपाली, उर्दू, मराठी, बांग्ला, पंजाबी, भोजपुरी, गढ़वाली और राजस्थानी में कविताओं का अनुवाद।