ब्रैड पिट और एंजेलिना जॉली ही नहीं
बेहद ही साधारण,
बेहद सामान्य लोग,
जिनके इर्द-गिर्द नहीं घूमती दुनिया,
जिनको कोई नहीं जानता,
सारे उपक्रम करने के बावजूद
जिनकी तरफ़ कोई मुड़कर नहीं देखता,
बिल्कुल ही अनाकर्षक लोग
जैसे, मेट्रो के दो डिब्बों के बीच
अपने में ही मशगूल वो युगल,
जैसे, कक्षा की आख़िरी बेंच पर बैठने वाला
वो शर्मीला लड़का,
जिसके प्रश्न अक्सर रह जाते हैं अनुत्तरित
प्रथम बेंच की शोभा बढ़ाती
घुँघराले बालों वाली एक लड़की के प्रेम में है।

अपनी ओर खींचते,
भँवरों के आकर्षण का केंद्र बने
पुष्प ही नहीं
घास-फूस, फुनगी,
दूर तक फैली जड़ें,
टहनियाँ,
लताएँ,
भी प्रेम में है।

कवियों को,
वैज्ञानिकों को
प्रेमियों को,
सबको
बेहद प्रिय
चाँद ही नहीं है
धरती का एकमात्र प्रेमी
दशकों बाद
बस एक नज़र निहारने को
आने वाला
वह पुच्छल तारा भी
धरती से निहायत प्रेम करता है।

इस दुनिया की हर गतिमान चीज़
किसी ना किसी गतिमान चीज़ के प्रेम में है।

(2015)

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कुशाग्र अद्वैत
कुशाग्र अद्वैत बनारस में रहते हैं, इक्कीस बरस के हैं, कविताएँ लिखते हैं। इतिहास, मिथक और सिनेेमा में विशेष रुचि रखते हैं।अभी बनारस हिन्दू विश्विद्यालय से राजनीति विज्ञान में ऑनर्स कर रहे हैं।

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