गाड़ी रुकी हुई थी।

तीन बंदूकची एक डिब्बे के पास आए। खिड़कियों में से अंदर झाँककर उन्होंने मुसाफिरों से पूछा- “क्यों जनाब, कोई मुर्गा है?”

एक मुसाफ़िर कुछ कहते-कहते रुक गया। बाकियों ने जवाब दिया- “जी नहीं।”

थोड़ी देर बाद भाले लिए हुए चार लोग आए। खिड़कियों में से अंदर झाँककर उन्होंने मुसाफिरों से पूछा- “क्यों जनाब, कोई मुर्गा-वुर्गा है?”

उस मुसाफिर ने, जो पहले कुछ कहते-कहते रुक गया था, जवाब दिया- “जी मालूम नहीं…आप अंदर आके संडास में देख लीजिए।”

भालेवाले अंदर दाखिल हुए। संडास तोड़ा गया तो उसमें से एक मुर्गा निकल आया। एक भालेवाले ने कहा- “कर दो हलाल।”

दूसरे ने कहा- “नहीं, यहाँ नहीं… डिब्बा खराब हो जाएगा… बाहर ले चलो।”

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सआदत हसन मंटो
सआदत हसन मंटो (11 मई 1912 – 18 जनवरी 1955) उर्दू लेखक थे, जो अपनी लघु कथाओं, बू, खोल दो, ठंडा गोश्त और चर्चित टोबा टेकसिंह के लिए प्रसिद्ध हुए। कहानीकार होने के साथ-साथ वे फिल्म और रेडिया पटकथा लेखक और पत्रकार भी थे। अपने छोटे से जीवनकाल में उन्होंने बाइस लघु कथा संग्रह, एक उपन्यास, रेडियो नाटक के पांच संग्रह, रचनाओं के तीन संग्रह और व्यक्तिगत रेखाचित्र के दो संग्रह प्रकाशित किए।

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